Ghaziabad

लोहिया नगर हिंदी भवन में 131 रचनाकारों ने एक साथ काव्य पाठ कर रचा इतिहास

गाजियाबाद: साहित्य प्रोत्साहन समिति की तरफ से आयोजित काव्य उत्सव में 131 रचनाकारों ने एक मंच से काव्य पाठ कर इतिहास बना दिया। लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन के मंच पर ऐसा आयोजन पहली बार हुआ जिसमें 131 कवि कवयित्रियों ने एक साथ काव्य पाठ किया में होगा। कार्यक्रम संयोजक राज कौशिक ने बताया कि शिक्षाविद एवं भाजपा नेता पृथ्वी सिंह कसाना के जन्म दिवस पर 2016 से प्रत्येक वर्ष कवि सम्मेलन का आयोजन होता आ रहा है। इस बार केवल सात आठ कवियों का कवि सम्मेलन ना करा कर गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के 100 से ज्यादा रचनाकारो के साथ काव्य उत्सव मनाने का निर्णय लिया गया।

वरिष्ठ गीतकार डॉ रमा सिंह कार्यक्रम ने काव्य उत्सव की अध्यक्षता की जबकि विश्व प्रसिद्ध शायर विजेंद्र सिंह परवाज़ और विधायक संजीव शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध कवयित्री अंजू जैन, कवि व स्तम्भकार रवि अरोड़ा और कवि डॉ चेतन डॉक्टर चेतन आनंद ने शिरकत की। मंच संचालन शायर राज कौशिक ने किया।

इस अवसर पर गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के 89 रचनाकारों की एक-एक रचना के साझा काव्य संग्रह “तवज्जो” का लोकार्पण भी किया गया। सभी रचनाकारों ने अपनी एक एक सर्वश्रेष्ठ रचना का पाठ किया। काव्य पाठ करने वालों में पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री वरिष्ठ भाजपा नेता बलराज शर्मा भी शामिल रहे। विधायक संजीव शर्मा, पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी, पिलखुवा नगर पालिका के अध्यक्ष विभु बंसल और वरिष्ठ पत्रकार सलामत मियां ने शानदार आयोजन के लिए सभी रचनाकारों को बधाई दी। साहित्य प्रोत्साहन समिति की तरफ से आशु बिंदल, सीपी सिंह तालियान, अनिल सांवरिया, अंकुर अग्रवाल, संदीप सिंघल, बिंदेश दीक्षित बॉबी, रवि कुमार आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। केके दीक्षित, अनिमेष शर्मा, ऋचा सूद, अरुण साहिबाबादी, आरपी शर्मा, नरेश मालिक, डॉ अशोक मैत्रेय, गार्गी कौशिक, अल्पना सुहासिनी आदि मंचासीन रहे लगातार 131 रचनाकारों का काव्य पाठ 8 घन्टे तक चला। विश्व प्रसिद्ध शायर विजेंद्र सिंह परवाज को इन शेरो पर बहुत दाद मिली-

ये जिंदगी भी कैसे बहाने में कट गई
जैसा नहीं हूं वैसा दिखाने में कट गई
बर्दाश्त किसको होती हैं खुद्दारियां यहां
गरदन हमारी सर को उठाने में कट गई
डॉ रमा सिंह को इन पंक्तियों पर बहुत दाद मिली-
आँसू की बरसात हुई है सारा आलम डूब गया।
होठों पर लेकर मुस्काने मैं भी ग़म में डूब गया।।
चेहरों पर चेहरे हैं कितने कहते कुछ करते हैं कुछ
ऐसे चेहरों के कारण ही देश का परचम डूब गया।।
शायर राज कौशिक को इस शेर पर खूब वाह वाही मिली-
सीधा सादा निश्छल निर्मल दिल का सच्चा हूं
इस पर लोग खफ़ा रहते हैं क्यों मैं अच्छा हूं
कवयित्री अंजू जैन का ये गीत बहुत पसंद किया गया-
तुम कहो तो भेज दूं मैं हिचकियां भी डाक से
साथ में कुछ बचपने की कश्तियां भी डाक से
चाहती हूं गोद में सर रख के सो जाऊं तेरी
भेज दे मां थपकिया और लोरियां भी डाक से
लौट कर आने का वादा करके भी आते नहीं
और आ जाती है उनकी वर्दियां भी डाक से
डॉ तारा गुप्ता का ये मुक्तक बहुत सराहा गया-
बड़े बदलाव की तैयारियों का यह जमाना है
हमें तो प्रेम की मिट्टी से बस इक घर बनाना है/
अचानक द्वार पर याचक कभी कोई खड़ा देखो
समझना इस रसोई घर में उसके हक का दाना है/
उषा श्रीवास्तव ‘उषाराज’ का ये अंदाज़ बहुत पसंद किया गया-
हम शिकंजों में ही कसते जा रहे हैं ध्यान देना
मज़हबी बातों में फंसते जा रहे हैं ध्यान देना
आज हिंदुस्तान में हर ओर खुशियां हैं मगर क्यों
हर किसी के दिल दरकते जा रहे हैं ध्यान देना ।
जगदीश मीणा की ये ग़ज़ल सभी को अच्छी लगी-
है कोई फ़िक्र तो ग़ज़लों में उसे ढलने दे
क्यूँ ख़यालों को रिसालों से अलग रखा है

Umesh Kumar

Umesh is a senior journalist with more than 15 years of experience. Freelance photo journalist with some leading newspapers, magazines, and news websites and is now associated with Local Post as Consulting Editor

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