गाजियाबाद नगर निगम की नई पहल: डूंडाहेड़ा एसटीपी में बनेगी बायो-सीएनजी, जहरीली गैस से होगा ईंधन तैयार

गाजियाबाद : पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में गाजियाबाद नगर निगम ने एक नई पहल करते हुए डूंडाहेड़ा स्थित 70 एमएलडी एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) पर बायो-सीएनजी प्लांट लगाने की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट के दौरान निकलने वाली हानिकारक गैसों को एकत्र कर पर्यावरण अनुकूल बायो-सीएनजी गैस तैयार की जाएगी।
महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की उपस्थिति में नगर निगम मुख्यालय में इस परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस दौरान महाप्रबंधक जल कामाख्या प्रसाद आनंद और वीए टेक वाबैग कंपनी के सीईओ शैलेश कुमार के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।
पीपीपी मॉडल पर बनेगा प्लांट
यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित की जा रही है। निगम के अनुसार इस योजना में नगर निगम का प्रत्यक्ष खर्च नहीं होगा, बल्कि इससे भविष्य में राजस्व प्राप्ति की भी संभावना है।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि डूंडाहेड़ा एसटीपी में प्रतिदिन 70 मिलियन लीटर सीवेज का उपचार होता है। इस प्रक्रिया के दौरान निकलने वाली मिथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसों को संग्रहित कर बायो-सीएनजी में बदला जाएगा। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि यह गैस उपयोगी ईंधन के रूप में भी काम आएगी।
नगर निगम के वाहनों में होगा उपयोग
महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि गाजियाबाद नगर निगम देश का पहला नगर निगम बनने जा रहा है, जो वेस्ट बायोगैस से बायो-सीएनजी तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि तैयार गैस का उपयोग नगर निगम के वाहनों में किया जाएगा। इसके अलावा इस परियोजना से निगम को आर्थिक लाभ भी मिलने की उम्मीद है।
प्रतिदिन बनेगी 1700 किलो बायो-सीएनजी
अधिकारियों के अनुसार इस प्लांट से प्रतिदिन लगभग 1700 किलोग्राम बायो-सीएनजी गैस तैयार की जाएगी। इससे एसटीपी से निकलने वाली हानिकारक गैसों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचेगा।
पर्यावरण सुधार की व्यापक योजना
नगर निगम का कहना है कि यह परियोजना व्यापक पर्यावरणीय सुधार योजना का हिस्सा है। एक ओर जहां उद्यान विभाग पौधारोपण अभियान चला रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। अब जलकल विभाग द्वारा बायो-सीएनजी प्लांट की शुरुआत को भी वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर अन्य एसटीपी पर भी विस्तार
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य एसटीपी प्लांटों पर भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू की जाएगी।
कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, मुख्य अभियंता नरेंद्र कुमार चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश, प्रभारी उद्यान डॉ. अनुज सहित नगर निगम और वीए टेक वाबैग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो यह शहरी अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में गाजियाबाद के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है।



