अमेरिका से हाथ मिलाएगा आत्मनिर्भर भारत, ‘अमृतकाल’ में रचेगा नया इतिहास
दिल्ली, 31 जनवरी 2024: यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स कौशांबी और इंडो अमेरिकन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने आज नई दिल्ली के होटल द लीला पैलेस में एक सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में अमृतकाल-आत्मनिर्भर भारत और अमेरिका के संबंधों में मजबूती लाने के विषय पर चर्चा की गई।
सम्मेलन का उद्घाटन भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सिटी ने किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के अधिनिष्ठ इन्वेस्ट यूपी भी भागीदार रहे।
सम्मेलन में अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सरकार द्वारा एक नए भारत की नींव रखी गई है, जो आत्मनिर्भर है। उन्होंने कहा कि भारत में होने वाले अमेरिकी निवेश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपने को और तेजी मिलेगी।
यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रबंध निदेशक डॉ उपासना अरोड़ा ने समारोह में सबका स्वागत करते हुए कहा कि “अमृतकाल-आत्मनिर्भर भारत” शब्द एक आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि को समाहित करता है जो न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि हम प्रौद्योगिकी, व्यापार, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं को पहचानते हैं।
अमेरिकी राजदूत एरिक गत सिटी ने द्विपक्षीय आर्थिक विस्तार के लिए भारत में बेहतर करधान और नियामक ढांचा तय करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका अंतरिक्ष में भी एक साथ काम कर रहे हैं, हम समुद्र की गहराई में भी एक साथ हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में, इस संबंध की हमारी कोई सीमा नहीं है।
इस मौके पर उपस्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के अध्यक्ष डॉक्टर पी एन अरोड़ा ने कहा कि अमेरिकी राजदूत के साथ मुलाकात में उन्होंने पाया कि भारत और अमेरिका विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने के साथ-साथ विश्व में वसुधैव कुटुंबकम की नींव रख सकते हैं।
समारोह के अंत में डॉक्टर ललित भसीन द्वारा सबका सम्मेलन में उपस्थित होने के लिए धन्यवाद दिया गया। इस मौके पर अभिषेक प्रकाश IAS, CEO- Invest UP भी मौजूद रहे।
सम्मेलन में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।



