सरस्वती शिशु मंदिर नेहरू नगर में भारतीय शिक्षा बोर्ड पर संवाद सभा का आयोजन

गाजियाबाद: पतंजलि विश्वविद्यालय और भारत स्वाभिमान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में सरस्वती शिशु मंदिर नेहरू नगर, गाजियाबाद में आज भारत सरकार द्वारा गठित भारतीय शिक्षा बोर्ड के विषय में एक संवाद सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ से डॉक्टर स्वामी परमार्थ देव, मुख्य केंद्रीय प्रभारी भारत स्वाभिमान न्यास हरिद्वार और भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एन पी सिंह ने शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी जी का पटका पहनाकर स्वागत कर किया गया। जूनियर पब्लिक स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार सेंगर के साथ सभी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं महासचिव मौजूद थे।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एन पी सिंह ने विस्तार से बोर्ड के बारे में जानकारी दी और स्कूल संचालकों को मान्यता लेने के लिए बोर्ड के मानकों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य देश में एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करना है जो छात्रों को नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जोड़े, साथ ही उन्हें 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करे।
इस अवसर पर परमिंदर गुलिया, अशोक त्यागी, एसपी सिंह, श्याम गुप्ता, राजवीर सिंह, टीकाराम पतंजलि परिवार दिल्ली एनसीआर, नोएडा स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चौहान, महासचिव राजेंद्र सिंह, सेंगर पब्लिक स्कूल के प्रबंधक इंद्रपाल सेंगर, सेल्फ फाइनेंस प्रोग्रेसिव पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के महानगर अध्यक्ष नरेंद्र कुमार बिल्लू, सर्व हिताय पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत त्यागी, साहिबाबाद क्षेत्र से पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष संत सिंह बंसल, इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल असोसिएशन के अध्यक्ष सुबोध त्यागी, महासचिव ललित त्यागी, तुषार त्यागी उपाध्यक्ष एवं जूनियर पब्लिक स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार सेंगर, महासचिव संजय त्यागी, रसम के संस्थापक संदीप त्यागी राष्ट्रीय अध्यक्ष, एस पी त्यागी और विभिन्न विद्यालयों से आए प्रबंधक, प्रधानाचार्य एवं अध्यापक-अध्यापिकाएं सैकड़ों की संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। इस संवाद सभा का आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की दिशा में एक सार्थक पहल है। भारतीय शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों को अपनाकर, स्कूल भारत के युवाओं को एक बेहतर भविष्य प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

