जीडीए वीसी ‘अतुल वत्स’ की बड़ी कार्रवाई, नियम विरुद्ध आवंटित 8 भूखंडों पर गिरी गाज, 20 करोड़ का होगा प्राधिकरण को फायदा!

नियम विरुद्ध आवंटित जीडीए की संपत्तियों के आवंटन के निरस्त होने से जीडीए को होगा लगभग 20 करोड़ का लाभ, अपनी दमदार कार्यशैली से वीसी अतुल वत्स जीडीए को करेंगे दोबारा मालामाल।
गाजियाबाद : गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 भूखंडों के आवंटन को निरस्त कर दिया है। इन भूखंडों का आवंटन नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया था। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से जीडीए को करीब 20 करोड़ रुपए का फायदा होगा।
यह कार्रवाई उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष दायर जनहित याचिका संख्या- 41773/2012 और प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ द्वारा आयोजित बैठक के निर्देशों के अनुपालन में की गई है।
निरस्त किए गए भूखंडों का विवरण:
- भूखंड संख्या-जी0के0-।।/161, इन्दिरापुरम: इस भूखंड को तत्कालीन सचिव श्याम सिंह के पारिवारिक सदस्य को आवंटित किया गया था।
- भूखंड संख्या-जी0के0-।।/192, इन्दिरापुरम: इस भूखंड के आवंटी ने प्राधिकरण को धोखा देकर भवन और भूखंड दोनों की रजिस्ट्री अपने नाम कराने की कोशिश की थी।
- भूखंड संख्या-जी0के0-।।/194, इन्दिरापुरम: इस भूखंड को हस्तिनापुरम आवासीय योजना से अपरिहार्य कारणों से निरस्त कर दिया गया था, लेकिन बाद में इसका परिवर्तन कर दिया गया था।
- भूखंड संख्या-जी0के0-।।/195, इन्दिरापुरम: इस भूखंड को भी हस्तिनापुरम आवासीय योजना से निरस्त कर दिया गया था और इसका परिवर्तन भी अनियमित तरीके से किया गया था।
- भूखंड संख्या-जी0के0-।।/196, इन्दिरापुरम: इस भूखंड के आवंटी की मृत्यु के बाद, उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को पेश करते हुए फर्जी तरीके से पंजीकरण कराया गया था।
- भूखंड संख्या-जी0के0-।।/197, इन्दिरापुरम: इस भूखंड का परिवर्तन कर्पूरीपुरम आवासीय योजना के समाप्त होने के 14 साल बाद किया गया था।
- भूखंड संख्या-जी0के0-।।/200, इन्दिरापुरम: इस भूखंड के आवंटी ने भी प्राधिकरण को धोखा देकर भवन और भूखंड दोनों की रजिस्ट्री अपने नाम कराने की कोशिश की थी।

अतिरिक्त जानकारी:
- एक अन्य भूखंड संख्या-जी0के0-।।/193, इन्दिरापुरम, गाजियाबाद मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में विचाराधीन है।
- जीडीए वीसी इस सख्त कार्रवाई के माध्यम से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और प्राधिकरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह उम्मीद की जा रही है कि जीडीए की इस कार्रवाई से भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगेगी और प्राधिकरण को इसका वित्तीय लाभ भी होगा।


