Ghaziabad

53 से अधिक वृक्ष प्रजातियों से समृद्ध गौर कैसकैडेस, हरित जीवनशैली का बना उदाहरण

  • सोसाइटी में औषधीय, पर्यावरणीय एवं उपयोगी पौधों की उल्लेखनीय विविधता; निवासियों की सामूहिक पर्यावरण प्रतिबद्धता को मिली नई पहचान

गाजियाबाद। शहरी जीवन के बीच हरित वातावरण और जैव-विविधता को संरक्षित करने की दिशा में गौर कैसकैडेस सोसाइटी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रही है। सोसाइटी परिसर में वर्तमान में 53 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष उपलब्ध हैं, जो इसे केवल एक आवासीय परिसर नहीं बल्कि एक समृद्ध हरित पारिस्थितिकी क्षेत्र के रूप में स्थापित करते हैं।

सोसाइटी प्रबंधन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार परिसर में नीम, पीपल, बड़, सहजन, अर्जुन, आँवला, अमलताश, रुद्राक्ष, सागौन, कचनार, गुलमोहर, बेलपत्र, जामुन, कटहल, दशहरी एवं आम्रपाली आम, चीकू, पपीता, नींबू, केला, चंपा, कनेर, पाइन, बाँस, विभिन्न प्रजातियों के पाम वृक्ष सहित अनेक औषधीय, छायादार और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त बेंजामिन फाइकस, रबर ट्री, रेड रूबी रबर, सिल्वर ऑक्स, मोरपंखी, एरोकेरिया (क्रिसमस ट्री), कैसुरीना, यूकेलिप्टस, बोतलब्रश और गोल्डन बोतलब्रश जैसे सजावटी एवं विशिष्ट वृक्ष भी इस हरित परिदृश्य का हिस्सा हैं। उल्लेखनीय है कि इस सूची में फूलदार पौधों, बेलों, कैक्टस और अन्य छोटे पौधों को शामिल नहीं किया गया है।

सोसाइटी प्रतिनिधियों के अनुसार यह जैव-विविधता केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वायु गुणवत्ता सुधार, प्राकृतिक संतुलन और सतत विकास के प्रति निवासियों की सोच को भी प्रतिबिंबित करती है।

इस संबंध में विक्रांत शर्मा एवं सोसाइटी के सचिव डॉ. अनुज कुमार राठी ने बताया कि इतनी व्यापक संख्या में वृक्षों एवं पौधों की उपलब्धता सोसाइटी के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार के औषधीय, पर्यावरणीय और प्रत्यक्ष उपयोगी पौधों की मौजूदगी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और स्वस्थ वातावरण तैयार करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार की हरित विविधता न केवल स्थानीय जैव-विविधता को बढ़ावा देती है, बल्कि तापमान नियंत्रण, वायु शुद्धिकरण और निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गौर कैसकैडेस की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि सामुदायिक स्तर पर नियोजित प्रयास किए जाएं तो आधुनिक आवासीय परिसर भी पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के मजबूत केंद्र बन सकते हैं।

LP News

Local Post News Network

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button