राजनगर एक्सटेंशन के मुद्दों पर दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ शोध, छात्राओं ने प्रस्तुत किए निष्कर्ष

गाजियाबाद/नई दिल्ली : राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र की समस्याओं, सुविधाओं और रहन-सहन से जुड़े मुद्दों पर किए जा रहे अकादमिक शोध को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के विवेकानंद कॉलेज में सोमवार को एक विशेष प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में फेडरेशन ऑफ राजनगर एक्सटेंशन सोसाइटीज (फ्रेंस) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह पहल 30 मई 2024 को फेडरेशन और विवेकानंद कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत शुरू हुई थी। इसके अंतर्गत वर्ष 2024 से कॉलेज की छात्राएं, प्रियांशु कुमारी झा, आरूषी कुमारी, श्रीदेवी कोल्ला और आदरिका सरीन, राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में रहन-सहन, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं पर शोध कर रही थीं।
कार्यक्रम में हुआ शोध का प्रस्तुतीकरण
27 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में फेडरेशन के अध्यक्ष सचिन त्यागी के नेतृत्व में वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. सुबोध गुप्ता, वरिष्ठ सचिव अभिनव त्यागी और कार्यकारिणी सदस्य आदित्य त्यागी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज की प्राचार्या प्रो. पिंकी मौर्य के साथ औपचारिक भेंट और स्वागत से हुई।
कार्यक्रम में कॉलेज की ओर से प्रो. युथिका मिश्रा, डॉ. गोपिका भंडारी, डॉ. रतीश झा और डॉ. अदिति सहित अन्य शिक्षकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने अपने शोध कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया, जिसमें उन्होंने स्थानीय निवासियों से बातचीत और क्षेत्रीय अध्ययन के आधार पर समस्याओं और संभावित समाधान प्रस्तुत किए।


स्थानीय मुद्दों के समाधान की दिशा में पहल
फेडरेशन की महासचिव और इस शोध की प्रमुख अन्वेषक डॉ. सीमा शर्मा ने बताया कि प्रस्तुत शोध के आधार पर एक अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिस पर फेडरेशन और कॉलेज दोनों की सहमति होगी। यह रिपोर्ट आगे संबंधित सरकारी विभागों और मंत्रालयों को भेजी जाएगी, ताकि क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
शोध का उद्देश्य और महत्व
फेडरेशन अध्यक्ष सचिन त्यागी ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस शोध के माध्यम से राजनगर एक्सटेंशन के स्थानीय मुद्दों की पहचान कर बेहतर पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।
कार्यक्रम के अंत में फेडरेशन प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। उपस्थित शिक्षकों और छात्राओं को उनके योगदान के लिए बधाई दी गई और इस पहल को समाज और शिक्षा के बीच सेतु के रूप में सराहा गया।


