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कुसुम ताई जिनसे मिलकर दिखी बापू की झलक

महात्मा गांधी आश्रम, सेवाग्राम, वर्धा शहर की भीड़ से दूर सुंदर और शांत स्थान। पक्षियों के कलरव के बीच सुंदर पेड़-पौधे, फूल और उन पर इठलाती तितलियाँ, चहचहाती मैना के झुंड और कूद-फांद मचाती लंगूरों की टोलियां। प्रकृति से सराबोर, ऐसी खूबसूरत जगह, जो किसी का भी मन मोह ले। गांधीजी ने देश को बहुत कुछ दिया। आदर्श, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाने वाले गांधी जी ने सिखाया कि बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर खत्म किया जा सकता है। उनके त्याग, निष्ठा को आज भी देश याद करता है और गांधीवादी सोच को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। गांधी जी हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके विचारों को आज भी जीवित रखने में एक महिला का बड़ा योगदान है। उनकी एक झलक ही गांधीजी की याद दिला सकती है। महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित गांधी आश्रम में आपको गांधी जी के जीवन से जुड़ी कई चीजें देखने को मिलेगी, लेकिन यहां बापू की कुटिया में एक बूढ़ी महिला आपको गांधीजी की कमी भी महसूस नहीं होने देगी। सफेद रंग की खादी की सूती धोती, आंखों में चश्मा, चरखे में सूत काटती इस महिला का नाम है कुसुम। गांधी आश्रम और वहां आने वाले लोग उन्हें कुसुम ताई कहते हैं। 

कुसुम ताई गांधी आश्रम की सबसे उम्रदराज महिला हैं, जिन्होंने बहुत छोटी उम्र से बापू के साथ काम किया है। 88 साल की कुसुम ताई गांधी जी के समय की शिक्षित महिला हैं। उन्होंने स्नातक किया हुआ है। गांधीजी चाहते थे कि आश्रम के बच्चे पढ़ाई के साथ ही आत्मनिर्भर बनें। इसलिए उन्होंने एजुकेशन फॉर लाइफ नाम का शिक्षण संस्थान शुरू किया था। इस संस्थान को चलाने के लिए गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने एक शिक्षा शास्त्री पति-पत्नी को आश्रम भेजा था। इसी संस्थान से कुसुम ताई ने भी शिक्षा हासिल की। यहां बच्चों को रोजगार की शिक्षा दी जाती थी। वहां पढ़ाई के साथ ही खेती, कटाई, बुनाई आदि का काम भी होता था।

कुसुम ताई गांधीजी के अलावा मीरा बेन के साथ भी रहीं। आस्ट्रिया से आई एक लड़की को गांधी जी ने अपनी शिष्या बनाया था और उनको मीरा बेन नाम दिया था। जब इस आश्रम का निर्माण हो रहा था, तो गांधी जी से पहले मीरा बेन ही आश्रम में आईं थीं और निर्माण कार्य संभाला था। वह आश्रम में रहने से पहले गांव में रहती थीं और मलेरिया पीड़ित मरीजों की सेवा करती थीं। बाद में आश्रम आ गईं।

मीरा बेन जब आश्रम की व्यवस्था देख रही थी, जब उनकी मदद जमुना लाल बजाज ने की। वह पूरी जमीन जमना लाल बजाज की ही है, जिसे उन्होंने गांधी आश्रम के लिए दी थी। कुसुम ताई एक छात्रा के तौर पर आश्रम आईं थीं और बाद में यहां कि एक सम्मानित शिक्षिका बन गईं।

कुसुम ताई ने इसी शिक्षण संस्थान के एक शिक्षक से विवाह कर लिया और उनके बच्चों ने भी शुरुआती शिक्षा यहीं से ली। बाद में अलग अलग क्षेत्र में उच्च पदों पर कार्यरत हो गए। कुसुम ताई आश्रम में ही रहती हैं और वहां के कोने कोने की स्मृति उनकी बातों और आंखों में साफ झलकती हैं। गांधी आश्रम में कुसुम ताई की मौजूदगी गांधीजी के होने का आभास कराती है। गांधीजी की झलक कुसुम ताई में दिखती है जो आज के युवाओं को महसूस कराती है कि भले ही उन्होंने बापू को कभी न देखा हो लेकिन उनके आदर्श कभी नहीं मिटेंगे। 

Munish Kumar

Munish is a senior journalist with more than 18 years of experience. Freelance photo journalist with some leading newspapers, magazines, and news websites, has extensively contributing to The Times of India, Delhi Times, Wire, ANI, PTI, Nav Bharat Times & Business Byte and is now associated with Local Post as Editor

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