‘किशनू’ : संवेदना, संघर्ष और स्त्री शक्ति की प्रभावी प्रस्तुति

दिल्ली। मुक्तधारा ऑडिटोरियम, दिल्ली में 13 जून, 2026 को मंचित नाटक ‘किशनू’ दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहाँ संवेदनाएं, सामाजिक विसंगतियां और स्त्री शक्ति एक साथ दिखाई देती हैं। मास्क प्लेयर्स आर्ट ग्रुप द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का लेखन और निर्देशन चन्द्र शेखर शर्मा ने किया है, जो सुप्रसिद्ध लेखिका गौरापंत ‘शिवानी’ के चर्चित लघु उपन्यास “किशनुली” पर आधारित है।
नाटक की कथा उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में घटित होती है। बौद्धिक दिव्यांग और अनाथ किशनू समाज की उपेक्षा और शोषण का शिकार बनती है, लेकिन काकी का चरित्र उसके जीवन में आशा और साहस का प्रतीक बनकर सामने आता है। नाटक स्त्री विमर्श को करुणा के साथ-साथ नारी शक्ति के दृष्टिकोण से भी प्रस्तुत करता है।


निर्देशक ने मूल कथा में कुछ नए पात्र जोड़कर मंचीय गति और मनोरंजन को बनाए रखा है। यही कारण है कि प्रस्तुति कहीं भी बोझिल नहीं लगती। जातिगत भेदभाव, अवैध संतानों के प्रति समाज का रवैया तथा दिव्यांगों के प्रति असंवेदनशीलता जैसे विषयों को भी नाटक प्रभावशाली ढंग से उठाता है।
अभिनय की दृष्टि से ममता रानी का किशनू का पात्र सबसे अधिक प्रभावित कर दर्शकों का मन जीत लिया। सरिता शर्मा ने काकी की भूमिका में संवेदना और दृढ़ता का सुंदर संतुलन प्रस्तुत किया। मनोज और रोहित शर्मा ने हास्य दृश्यों में ऊर्जा भर दी। रवीन्द्र सिंह व वरिष्ठ रंगकर्मी राकेश शर्मा के अभिनय को देखना सुखद अनुभूति रही। जतिन, संजीव कुमार, सागर शर्मा और शिल्पा ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया। उद्घोषिका माला नेगी ने सफल मंच संचालन किया।
मंच के पीछे में नीरज डंगोरिया की प्रकाश व्यवस्था, शिप्रा जैन का संगीत तथा शिल्पा के कॉस्ट्यूम और प्रॉप्स उल्लेखनीय रहे। मंच उद्घोषणा माला नेगी ने प्रभावी ढंग से संभाली। कुल मिलाकर ‘किशनू’ एक ऐसी प्रस्तुति है जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश भी देती है।

