काव्यलोक की काव्य गोष्ठी में गूंजी कविता की स्वरधारा, जन्म माह वाले साहित्यकारों का हुआ सम्मान

- नई परंपरा की शुरुआत, गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर के करीब 40 कवियों ने किया काव्यपाठ
गाजियाबाद। शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था काव्यलोक द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि संस्था ने एक नई परंपरा का शुभारंभ करते हुए उन साहित्यकारों को सम्मानित किया, जिनका जन्मदिन संबंधित माह में आता है।
नई पहल के अंतर्गत इस माह डॉ. तारा गुप्ता, शैलेश अग्रवाल और भूपेन्द्र त्यागी को जन्मदिवस की शुभकामनाओं के साथ सम्मानित किया गया। संस्था की इस पहल का उपस्थित साहित्यकारों ने स्वागत करते हुए इसे रचनाकारों के सम्मान और पारस्परिक आत्मीयता को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध शायर अनिमेष शर्मा ने की, जबकि शुभारंभ अपर्णा भटनागर द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। गोष्ठी का प्रभावी संचालन गार्गी कौशिक ने किया।
संस्था के अध्यक्ष दीक्षित दनकौरी की गरिमामयी उपस्थिति में गाजियाबाद तथा दिल्ली-एनसीआर से आए लगभग 40 कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। काव्य गोष्ठी में गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहे और समसामयिक विषयों पर आधारित कविताओं की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कवियों ने सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रप्रेम, प्रकृति और जीवन के विविध रंगों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ संवेदनाओं को जीवित रखने का सशक्त माध्यम है। ऐसी काव्य गोष्ठियां न केवल रचनाकारों को अपनी अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के अंत में संस्था के संस्थापक राजीव सिंहल ने सभी कवियों, अतिथियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि काव्यलोक भविष्य में भी साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य के संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
काव्य गोष्ठी के उपरांत सभी प्रतिभागियों ने आपसी संवाद और आत्मीय वातावरण के बीच सामूहिक भोजन का आनंद लिया। साहित्यिक सौहार्द, उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियों और नई परंपरा की शुरुआत के कारण यह आयोजन प्रतिभागियों के लिए यादगार बन गया।



