Ghaziabad

श्री सुल्लामल रामलीला भरत मनावन लीला से अत्रि अनुससुईया का उपदेश, सीता हरण, जटायु मोक्ष से शबरी प्रसंग तक

गाजियाबाद: पंचवटी जाने से पहले श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की भेंट सती अनुसुइया से होती है। यहां सती अनुसुइया माता सीता को स्त्री धर्म और पति ध र्म निभाने के बारे में बताती हैं। सती अनुसुइया ने सीता को उपदेश दिए। कहा कि पति की सेवा करना ही नारी का परम धर्म है। उनकी आज्ञा का आदर करना चाहिए। पति के बिना कभी किसी अनजाने स्थान पर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने सीता को स्त्री धर्म निभाने के अन्य कई और सूत्र भी बताए।

जब भरत अयोध्या पहुँचते है तो उन्हें श्रीराम के वन गमन की जानकारी मिलती है तब वह श्रीराम को मनाने के लिए चित्रकूट जाते हैं लेकिन श्रीराम अयोध्या वापस जाने से मना कर देते हैं और भरतजी श्रीरामजी की खड़ाऊ लेकर आते हैं और उसको सिंहासन पर रखकर राजकाज चलाते हैं।

रावण अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए मामा मारीच की सहायता लेता है। मारीच स्वर्ण हिरण बनकर सीता को आकर्षित करता है। सीता हिरण को पकड़ने का राम से अनुनय करतीं हैं। राम स्वर्ण हिरण के पीछे जाते हैं। उनके बाण से आहत मारीच चिल्लाते हुए लक्ष्मण का नाम पुकारता है। सीता समझतीं हैं कि राम सहायता के लिए लक्ष्मण को बुला रहे हैं। वे लक्ष्मण को राम के सहयोग के लिए जाने को विवश करती हैं। इधर, रावण साधू का रूप धारण कर सीता का हरण कर ले जाता है। सीता की खोज में निकले राम पहले जटायु को मोक्ष देते हैं और फिर शबरी के यहां पहुंचते हैं।

लीला में प्रमुख रूप से अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार वीरो, उस्ताद अशोक गोयल, कार्यवाहक महामंत्री दिनेश शर्मा बब्बे, संजीव मित्तल, अनिल चौधरी, आलोक गर्ग, ज्ञान प्रकाश गोयल, नरेश अग्रवाल, सुधीर गोयल, पार्षद नीरज गोयल, सुनील गर्ग, सुभाष शर्मा, अनिल अरोड़ा आदि पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

Umesh Kumar

Umesh is a senior journalist with more than 15 years of experience. Freelance photo journalist with some leading newspapers, magazines, and news websites and is now associated with Local Post as Consulting Editor

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button