राजनगर एक्सटेंशन: राज एम्पायर सोसाइटी में हंगामा, गार्ड की बदसलूकी व मारपीट के विरोध में जारी प्रदर्शन, पुलिस-प्रशासन मौके पर बुलाया गया; गौड़ कैस्केड्स भी एओए संकट में

ग़ाज़ियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की हाईराइज़ सोसाइटियों में निवासियों और प्रबंधन के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। ताज़ा घटनाक्रम राज एम्पायर सोसाइटी का है, जहाँ रविवार को एक सुरक्षा गार्ड द्वारा निवासिनी कंचन माथुर से अभद्रता और निवासी मयंक कौशिक से मारपीट के बाद हालात बेकाबू हो गए। इस घटना के विरोध में सोमवार सुबह से ही निवासी मेंटेनेंस ऑफिस के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं, और पुलिस-प्रशासन को मौके पर बुलाया गया है।
निवासियों की प्रमुख माँगें
- आरोपी गार्ड मनोज को सार्वजनिक माफी माँगनी होगी और लिखित माफीनामा देना होगा।
- मौजूदा सिक्योरिटी एजेंसी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।
- लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और उपेक्षा को देखते हुए एस्टेट मैनेजर संतोष तिवारी को हटाकर नया मैनेजर नियुक्त किया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिल्डर और प्रबंधन की लापरवाही के कारण सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएँ खतरे में पड़ी हुई हैं। स्थिति यह हो गई कि मेंटेनेंस स्टाफ ने आवश्यक सेवाएँ रोक दीं, जिससे निवासियों में गहरा आक्रोश है। जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज़ हो रहा है, सोसाइटी परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

गौड़ कैस्केड्स भी विवादों में उलझा
राजनगर एक्सटेंशन की दूसरी प्रमुख सोसाइटी गौड़ कैस्केड्स में भी एओए (Apartment Owners Association) चुनावों के बाद गतिरोध गहराता जा रहा है। यहाँ दो गुटों में गुटबाज़ी इतनी बढ़ गई है कि फिजिकल मीटिंग्स की जगह ऑनलाइन बैठकों में निर्णय लिए जा रहे हैं, जिन पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं।
बड़ी तस्वीर: NCR की सोसाइटियों में बढ़ता संकट
राज एम्पायर और गौड़ कैस्केड्स की घटनाएँ इस बात की गवाही देती हैं कि NCR की सोसाइटियाँ अब केवल रहने की जगह नहीं रहीं, बल्कि आपसी राजनीति, वित्तीय अपारदर्शिता और प्रबंधन की विफलताओं का अखाड़ा बन गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 में पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रावधान है, लेकिन जब तक प्रशासन सक्रिय निगरानी नहीं करता, निवासियों की समस्याएँ और गहराती जाएँगी।

निवासियों की अपील
निवासियों ने मांग की है कि ग़ाज़ियाबाद प्रशासन और पुलिस तत्काल हस्तक्षेप कर इस विवाद को सुलझाए और हाईराइज़ सोसाइटियों के प्रबंधन पर सख्त नियम लागू करे। उनका कहना है कि अगर प्रशासन अब भी चुप रहा तो आधुनिक टावरों का सपना निवासियों के लिए रोज़मर्रा की मुश्किल बन जाएगा।



