गाजियाबाद में सेप्सिस पर सार्वजनिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन, ‘रोकें, इलाज करें, हराएं सेप्सिस’ अभियान को मिला समर्थन

गाजियाबाद, 31 जनवरी 2024: इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (ISCCM) गाजियाबाद ने आज सेंट जोसेफ अस्पताल गाजियाबाद के सहयोग से आम जनता और प्रेस के लिए एक सार्वजनिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। ISCCM के ‘रोकें, इलाज करें, हराएं सेप्सिस’ मॉड्यूल और वर्ष के विषय के तहत यह कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में सेप्सिस के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाला एक वीडियो दिखाया गया और कार्यक्रम का परिचय डॉ अनिल कुमार संतोष मेडिकल कॉलेज गाजियाबाद के डॉक्टर ने दिया। इसके बाद डॉ सी देवा राहुल ने स्पष्ट किया कि सेप्सिस क्या है, इसके प्रकार क्या हैं, और इसके मामलों की संख्या तथा प्रारंभिक उपचार और परिणामों का संक्षिप्त विवरण दिया। सेप्सिस को कैसे रोका जाए और हाथ की स्वच्छता का प्रदर्शन श्रीमती गीता पॉल, ICN सेंट जोसेफ अस्पताल द्वारा किया गया।
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि दुनिया भर में लगभग 5 करोड़ और भारत में लगभग 1 करोड़ लोग सेप्सिस से पीड़ित हैं। भारत में इन 1 करोड़ में से 30 लाख लोगों की मृत्यु का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कारण सेप्सिस रहा है। विश्व स्तर पर हर 5 में से 1 मौत का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेप्सिस से संबंध है। सेप्सिस के जीवित बचे रहने वाले लोग भी जीवन भर इसके परिणाम भुगत सकते हैं।
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि सेप्सिस शरीर की संक्रमण के प्रति अतिरंजित प्रतिक्रिया है, जो एक तीव्र और जीवन-घातक अंग विफलता का कारण बनता है। हालांकि, इसकी पहचान जल्दी हो जाए तो इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है।
कार्यशाला के अंत में इस संदेश के साथ समापन किया गया कि ‘सेप्सिस रोका जा सकता है, सेप्सिस का इलाज किया जा सकता है, सेप्सिस को हराया जा सकता है।’ हर किसी को चाहिए कि सेप्सिस के कारणों और परिणामों के बारे में जागरूक हों। जागरूकता फैलाकर हम इसे बुनियादी हाथ की स्वच्छता के माध्यम से रोक सकते हैं और यदि यह हो जाए तो हम इसे जल्दी पहचान कर जल्दी से इलाज कर सकते हैं, जिससे सेप्सिस से होने वाली मृत्यु दर और जटिलताओं को कम किया जा सके।



