गृहस्थ जीवन की सफलता भगवान शिव से सीखे : अतुल कृष्ण भारद्वाज
गाजियाबाद, 28 जनवरी 2024: सेवा प्रकल्प संस्थान से संबंध वनवासी कल्याण आश्रम के द्वारा कवि नगर रामलीला मैदान में आयोजित की जा रही रामकथा के दूसरे दिन कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने स्वर्ग-नरक और गृहस्थ जीवन की सुंदर व्याख्या की।
उन्होंने बताया कि मनुष्य जब अपनी अज्ञानतावश भौतिक सुख हेतु दुराचार, पापाचार, व्याभिचार, भ्रष्टाचार में लिपटा हो जाता है, तो उसे नरकीय जीवन यापन करना पड़ता है, वह परमात्मा तक नहीं पहुंच पाता है और बार-बार जीवन-मरण की लीला में भटकता रहता है। पूज्य व्यास जी बताते हैं कि इस कलियुग में श्रीमद्भागवत एवं श्रीरामचरितमानस रूपी गंगा ही, प्राणि को इस भवसागर से पार कराकर आत्मा को परमात्मा से मिलन करा सकता है, यानी स्वर्ग की प्राप्ति संभव है। इस कलियुग में केवल राम नाम और सत्संग ही मोक्षधार है।
उन्होंने गृहस्थ जीवन कैसा होना चाहिए, पति-पत्नी के मध्य संबंध कैसे होने चाहिए, यह सब भगवान शिव से सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि पिता के घर, मित्र के घर, स्वामी के घर और गुरु के घर बिना बुलाए जाना चाहिए, लेकिन जब कोई समारोह हो तो बिना बुलाए नहीं जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में अवसर होने के अलावा कुछ नहीं मिलता। पत्नी अगर किसी विषय पर चिंतित हो तो उपयोग कैसे समझें, यह भगवान शिव से सीखा जाना चाहिए। यदि पत्नी नहीं मानती है तो भगवान भरोसे छोड़ देना चाहिए। गृहस्थ जीवन में तनाव पैदा करने से कुछ लाभ नहीं होना चाहिए। संसार का समाधान खोजना चाहिए।
पूज्य व्यास जी ने कहा कि मनुष्य आज 70 वर्ष की आयु में जी रहा है। यदि इसे अधिक आयु है तो समझे कि बोनस प्राप्त है। मनुष्य के जीवन में चार पद आते हैं, उसका पूर्ण सदुपयोग करना चाहिए। अंतिम समय में जो संन्यास आश्रम की बात पुराणों में की गई है, उसका भी पालन करना चाहिए, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह घर-परिवार को छोड़कर चला जाए, बल्कि घर को ही बैकुंठ बनाए।
उन्होंने कहा कि हनुमान जी की तरह भगवान के नाम को सुमिरन और कीर्तन करते रहें। शरीर का संबंध स्थिर नहीं होता, स्थिर संबंध तो आत्मा का परमात्मा से होता है। इसलिए मनुष्य को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना चाहिए, उसे संकुचित नहीं करना चाहिए। मनुष्य को सियाराम में सब जग जानी के सिद्धांत पर जीना चाहिए। सभी में परमात्मा का दर्शन करना चाहिए।
आज के यजमान श्रीमती एवं संजीव अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, सुशील अग्रवाल और अजय भारतीय रहे। संचालन अंबरीश सिंह ने किया। समिति के सदस्य मनीष अग्रवाल, राहुल यादव, भानु सिसोदिया और श्री नवीन कुमार का विशेष सहयोग रहा।



