Ghaziabad

25 साल बाद मंदिर लौटा आस्था का प्रतीक: मोदीनगर के महामाया देवी मंदिर में पुलिस ने पहुंचाया चोरी हुआ 51 किलो वजनी घंटा

मोदीनगर : 25 साल पहले गाजियाबाद के मोदीनगर में गांव सीकरी खुर्द स्थित महामाया देवी मंदिर से चोरी हुए 51 किलो वजनी घंटे को इंसाफ पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। पूर्व में कई पुजारियों और गांव के प्रधानों ने पुलिस से घंटे की मांग की। लेकिन यह घंटा मोदीनगर थाने के मालखाने में कैद रहा। गुरुवार को पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड के आदेश पर मोदीनगर SHO नरेश शर्मा ने इस घंटे को मंदिर पहुंचा दिया। इस घंटे की कीमत 2 से ढाई लाख बताई गई है।

2000 में मंदिर से चोरी हुआ था घंटा

गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र के गांव सीकरी खुर्द स्थित महामाया देवी मंदिर में सन 2000 के माह मई मंदिर परिसर में कुंतल वजनी घंटा चोरी हो गया था। पुलिस ने 2 महीने के भीतर तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर घंटा बरामद कर लिया था। लेकिन तब से यह घंटा मोदीनगर थाने के मालखाने में ही पड़ा रहा। ग्रामीणों ने घंटे को वापस पाने के लिए कोर्ट और थाने के कई चक्कर लगा रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश के बिना घंटा देने से मना कर दिया। कोर्ट ने घंटे के अधिकार के दस्तावेज नहीं होने के कारण आदेश जारी नहीं किए थे। ग्रामीण लंबे समय से पुलिस से यह घंटा रिलीज करने की मांग कर रहे थे।

सीकरी के प्राचीन मंदिर से 25 साल पहले चोरी हुआ था यह घंटा

पिछले दिनों पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने मोदीनगर थाने को निरीक्षण किया था। जिसमें घंटे का पता चला। जिसके बाद कानूनी राय ली गई। पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड के आदेश पर गुरुवार को एसएचओ मोदीनगर ने मानवता के आधार पर गांव की पूर्व प्रधान संसार देवी को थाने से घंटा सौंप दिया गया। एसएचओ नरेश शर्मा ने बताया कि घंटा बहुत भारी है। यह तांबा, पीतल और कई मिश्रित धातुओं से बना है। जिसका वजन तोला गया तो 51 किलो निकला। देखने में बहुत छोटा है, लेकिन यह तीन आदमियों पर उठाकर रखा गया। मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी सरकारी तंत्र के पास है। मंदिर समिति के अध्यक्ष एसडीएम होते हैं। पुलिस ने इस घंटे की कीमत दो से ढाई लाख बताई है।

गांव सीकरी खुर्द स्थित महामाया देवी मंदिर परिसर में में चैत्र नवरात्र मेला लगता है। मेले में उत्तर भारत से बीस लाख से अधिक श्रद्वालू प्रसाद चढ़ाकर व पूर्जा अर्चना करके मन्नते मांगते है। मंदिर के मुख्य मंहत देवेन्द्र शास्त्री ने बताया कि चार साल सौ पहले मंदिर की स्थापना की गई थी। जब से ही मंदिर परिसर में मेला लगता आ रहा है। मंदिर में रोजाना भी पांच हजार से अधिक लोग माता के दर्शन करने के लिए आते है।

सन 1857 की लड़ाई का गवाह रहा है मंदिर

मंदिर परिसर में खडे़ वृटवृक्ष आजादी की लड़ाई का गवाह है। सात जुलाई सन 1857 को सीकरी खुर्द के युवा टूड़ा चंदेला के नेतृत्व में क्रांतिकारी सेना में शामिल होने दिल्ली जा रहे थे। हिडन नदी पर अग्रेजी सेना देखकर युवाओं ने अपनी रणनीति बदली और गांव बेगमाबाद स्थित ट्रंजरी को लूट लिया। इसके बाद अंग्रेजी सेना भी हमला बोल दिया।

युवा सीकरी खुर्द स्थित मंदिर परिसर में छिप गए। दो घंटे चले युद्व में 70 क्रांतिकारियों को बरगद के पेड़ पर फांसी दी गई और गंाव में आग लगा दी थी। मंदिर को भी काफी नुकसान हुआ था। पयर्टन विभाग ने बरगद के पेड़ को ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर रखा है।

Umesh Kumar

Umesh is a senior journalist with more than 15 years of experience. Freelance photo journalist with some leading newspapers, magazines, and news websites and is now associated with Local Post as Consulting Editor

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