हिंडन श्मशान घाट का हो रहा सौंदर्यीकरण: शिव की जटा से जल प्रवाह, हरित शवदाह गृह सितंबर से होगा शुरू

गाज़ियाबाद। नगर निगम गाज़ियाबाद ने हिंडन नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यहां हरित शवदाह गृह का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है और सितंबर माह से इसे जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत पर्यावरण अनुकूल आधुनिक दाह संस्कार संयंत्र लगाए गए हैं, जिससे लकड़ियों की खपत कम होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
निगम द्वारा स्थापित किए गए दो गैस आधारित (सीएनजी) और एक लकड़ी आधारित संयंत्र विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। लकड़ी वाले संयंत्र में सामान्य लकड़ी की जगह गोबर से बनी लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, एक दाह संस्कार में जहां पहले 400 से 500 किलो लकड़ी की खपत होती थी, वहीं अब केवल 80 से 100 किलो लकड़ी से ही संस्कार संभव हो सकेगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि प्रति संस्कार लगभग दो पेड़ बचेंगे और धुएं का उत्सर्जन भी काफी कम होगा। सीएनजी संयंत्र से केवल ढाई से 3 किलो राख ही निकलेगी।
इस पहल के साथ-साथ श्मशान घाट को आधुनिक स्वरूप भी दिया जा रहा है। मोक्ष स्थल पर शव यात्रा के साथ आने वाले लोगों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। निर्माण विभाग द्वारा नए प्रवेश द्वार और कार्यालय का निर्माण भी कराया गया है। वहीं, शंकर भगवान की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जिनकी जटा से प्रवाहित होने वाले जल से शव का अंतिम स्नान भी कराया जाएगा।
नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक परंपराओं के संतुलन पर विशेष ध्यान दे रहा है। ग्रीन रिवॉल्यूशन फाउंडेशन के सहयोग से चल रही इस परियोजना में श्मशान घाट के 40 से अधिक प्लेटफॉर्म की मरम्मत भी की जा रही है। इसके साथ ही प्रकाश व्यवस्था, उद्यान, जलकल और स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से यहां कार्य कर रहे हैं।
मुख्य अभियंता नरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि यह पहल न केवल हिंदू रीति-रिवाजों के अनुरूप है बल्कि आने वाले समय में पेड़ों और नदियों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। गाज़ियाबाद नगर निगम की यह कोशिश शहर को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में एक मिसाल है।



