सेवारत शिक्षकों को मिले टीईटी से राहत: शिक्षकों ने सरकार से किया संशोधन की मांग

गाजियाबाद : शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। देशभर में लाखों सेवारत शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय से चिंतित हैं, जिसमें कहा गया है कि दो वर्षों के भीतर टीईटी उत्तीर्ण न करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी।
हालांकि, अदालत ने उन शिक्षकों को भी राहत नहीं दी जिनकी सेवा अवधि केवल 5 वर्ष शेष है। ऐसे शिक्षकों को नियुक्ति पर बने रहने की छूट दी गई है, लेकिन पदोन्नति के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस निर्णय से शिक्षकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी ने स्पष्ट किया कि टीईटी एक ऐसी परीक्षा है जो नियुक्ति के समय चयन के लिए बनाई गई थी, न कि पहले से कार्यरत शिक्षकों की पात्रता की पुनः जांच के लिए। उन्होंने कहा –
“जो शिक्षक 23 अगस्त 2010 के आरटीई नोटिफिकेशन से पूर्व नियुक्त किए गए हैं, उनकी नियुक्ति सेवा नियमावली के अनुरूप थी। उस समय टीईटी की कोई अनिवार्यता नहीं थी। इसलिए सेवा काल में अर्हता को बदलना उचित नहीं है।”
जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा ने कहा कि सरकार को इस प्रकरण का सहानुभूतिपूर्वक और व्यवहारिक दृष्टिकोण से समाधान करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सेवा नियमावली के अनुसार नियुक्त शिक्षकों को उनके नियुक्ति समय की योग्यता के आधार पर ही पदोन्नति मिलनी चाहिए और उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए।
आज इस मांग को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा, प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदेश मित्तल, ब्लॉक अध्यक्ष लोनी मनोज डागर, ब्लॉक अध्यक्ष रजापुर मनोज त्यागी, ब्लॉक अध्यक्ष भोजपुर पुष्पेंद्र सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष मुरादनगर अमित यादव, कनक सिंह, लक्ष्मण राठी, दिनेश कुमार, मोहम्मद ग़ालिब सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।



