सर्वपितृ अमावस्या पर बृजघाट गंगा तट पर हुआ सामूहिक तर्पण, पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए जुटे श्रद्धालु

बृजघाट (गाजियाबाद)। सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर बृजघाट स्थित गंगा तट पर करोड़ों सनातनी पूर्वजों की पवित्र आत्माओं की शांति के निमित्त सामूहिक तर्पण का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीगंगा आरती समिति बृजघाट, नमामि गंगे, गंगा विचार मंच (जल शक्ति मंत्रालय) तथा शाश्वत हिंदू संगठन के प्रतिनिधि देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित हुए और शास्त्र सम्मत विधि-विधान से तर्पण संपन्न कराया।
राष्ट्रीय स्तर पर सनातन संस्कृति के संवर्धन के लिए सतत प्रयासरत शाश्वत हिंदू संगठन का ध्येय वाक्य है –
“सनातन का प्राण पवित्र मंदिर, भक्ति के साथ शक्ति का केंद्र बने। दो घंटे मंदिर के नाम, राष्ट्र-संस्कृति का करें काम।”
इसी संकल्प को मूर्त रूप देते हुए संगठन ने गंगा सभा और आरती समिति के सहयोग से तर्पण का आयोजन किया।
इस अवसर पर कपिल शर्मा ने सामूहिक तर्पण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि सनातन संस्कृति की मूल भावना का प्रतीक है। संजय शर्मा ने कहा कि पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक तर्पण न केवल शास्त्र सम्मत विधि है, बल्कि इससे सनातनी समाज में सुख-समृद्धि आती है। उन्होंने विश्वास जताया कि पूर्वजों का आशीर्वाद भारत को विश्व का सिरमौर बनाएगा।
संदीप त्यागी रसम ने दिवंगत आत्माओं का राजनीतिक लाभ-हानि के लिए नाम लेने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में मृतकों के लिए किसी भी प्रकार की दुर्भावना वर्जित है। उन्होंने कहा कि “दिवंगत आत्माओं के लिए केवल शांति और सद्गति की प्रार्थना होती है, अपशब्दों का कोई स्थान नहीं है। जो ऐसा करता है, वह धर्म के मर्म को समझने में विफल है।”
रवि कटारिया ने उपस्थित जनों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सामूहिक तर्पण जैसी परंपराएं समाज को एकजुट करती हैं और यह प्रयास पूरे देश में होना चाहिए। उन्होंने सभी क्षेत्रीय संगठनों से ऐसे आयोजनों में सहयोग देने की अपील की।
इस अवसर पर संजय शर्मा, कपिल शर्मा, रवि कटारिया, मुन्ना पाठक, वीरेंद्र, संदीप त्यागी रसम, पंकज गोयल, मुकेश मित्तल, मनोज शर्मा, कुलदीप, राहुल उपाध्याय, अजय शर्मा और अल्का निम सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
गंगा तट पर गूंजे वैदिक मंत्रों और शांति प्रार्थनाओं ने पूरे वातावरण को पवित्र बना दिया। आयोजन में उपस्थित जनमानस ने पूर्वजों की आत्मा की शांति और समाज की समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प लिया।



