श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में 27 अगस्त से शुरू होगा गणपति लड्डू महोत्सव, 1100 लड्डुओं का होगा भोग, 30 अगस्त को शोभायात्रा संग विसर्जन

गाज़ियाबाद। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में इस वर्ष भी भव्य श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। मंदिर के पीठाधीश्वर, श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता व दिल्ली संत महामंडल अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य और अध्यक्षता में 27 अगस्त से 29 अगस्त तक गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना होगी, जबकि 30 अगस्त को शोभायात्रा के साथ भगवान गणेश का विसर्जन श्री दूधेश्वर घाट, छोटा हरिद्वार, मुरादनगर में धूमधाम से किया जाएगा।
भव्य कार्यक्रम और दिव्य अनुष्ठान
महोत्सव की शुरुआत 27 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त में गणेश प्रतिमा की स्थापना से होगी। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद महाराजश्री स्वयं भगवान गणेश का अभिषेक और पूजन करेंगे। 27 से 29 अगस्त तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक पंचोपचार पूजन, पंचामृत अभिषेक और गणेश अथर्वशीर्ष से महाभिषेक होगा। विशेष रूप से 1008 नामों से दूर्वा अर्पित कर सहस्रार्चन किया जाएगा और भगवान गणेश को 1100 लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाएगा।
सायंकाल 5 बजे से 7 बजे तक गणपति पूजन-अर्चन होगा और रात 8 बजे से 10 बजे तक भजन-संध्या, नृत्य-नाटिका और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन होगा। गणपति महिमा का भजन-कीर्तन होगा और श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
शोभायात्रा और विसर्जन
30 अगस्त को गणपति बप्पा को रथ पर विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। ढोल-ताशों, बैंड, डीजे, झांकियों और भजन-कीर्तन के साथ शोभायात्रा दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर से निकलकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्री दूधेश्वर घाट, छोटा हरिद्वार, मुरादनगर पहुंचेगी। वहां विधिवत आरती कर गणपति बप्पा को “गणपति बप्पा मोरया, अगले वर्ष तू जल्दी आ” के जयघोष के बीच विदाई दी जाएगी।
आयोजन और व्यवस्था
सभी कार्यक्रम श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के सानिध्य में होंगे। आयोजन में श्रीमहंत गौरी गिरि दूधेश्वर नाथ महादेव मठ मंदिर समिति, अध्यक्ष धर्मपाल गर्ग और उपाध्यक्ष अनुज धर्म गर्ग का विशेष सहयोग रहेगा। व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दूधेश्वर श्रृंगार सेवा समिति अध्यक्ष विजय मित्तल और पूरे दूधेश्वर परिवार की रहेगी।
यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि और सामूहिक श्रद्धा का अनूठा संगम भी है, जिसकी गूंज ग़ाज़ियाबाद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में सुनाई देती है।



