वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति ने गणेश चतुर्थी पर 143 विद्यार्थियों को बाँटी ₹5.73 लाख की छात्रवृत्ति, शिव मंदिर प्रांगण गूँजा भजनों से

ग़ाज़ियाबाद। वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति, ग़ाज़ियाबाद ने गणेश चतुर्थी और छात्रवृत्ति वितरण समारोह को धर्म और समाज सेवा के अनूठे संगम के रूप में मनाया। शिव मंदिर, नेहरू नगर प्रांगण में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष डॉ. जे.एल. रैना ने की। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण का अनोखा समन्वय देखने को मिला।
धार्मिक अनुष्ठान और प्रसाद वितरण
कार्यक्रम का शुभारंभ समिति महासचिव आर.के. गुप्ता और उनकी धर्मपत्नी सरिता गुप्ता द्वारा हवन-पूजन से हुआ। विधि-विधानपूर्वक गणेश पूजन और वंदना के बाद प्रसाद वितरित किया गया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।
मेधावी बच्चों को मिला संबल
इसके उपरांत छात्रवृत्ति वितरण समारोह शुरू हुआ। इस अवसर पर समिति महासचिव आर.के. गुप्ता ने समिति की सेवा गतिविधियों और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। शिक्षा प्रकल्प प्रभारी ए.के. गुप्ता ने बताया कि समिति द्वारा इस बार ग़ाज़ियाबाद के विभिन्न विद्यालयों से चयनित 143 मेधावी एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को कुल ₹5.73 लाख की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। यह राशि समिति सदस्यों और समाजसेवी दानदाताओं के सहयोग से एकत्र की गई थी।
समिति अध्यक्ष डॉ. जे.एल. रैना ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा—
“आप ही देश का भविष्य हो। शिक्षा ही समाज में वास्तविक परिवर्तन ला सकती है। मन लगाकर पढ़ाई करें और जिम्मेदार नागरिक बनें। समिति आपकी पढ़ाई में कभी भी आर्थिक अभाव नहीं आने देगी।”
भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल
छात्रवृत्ति वितरण के बाद भजन मंडली मल्होत्रा एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत भजनों ने उपस्थित लोगों को भक्ति और आनंद से भर दिया।

समापन और आभार
समारोह का समापन राष्ट्रीय गान और सामूहिक प्रसाद वितरण (भोजन) के साथ हुआ। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष ने सभी उपस्थित सदस्यों, मातृशक्ति और मंडली का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में वी.पी. रस्तोगी, रमेश अरोरा, एल.डी. शर्मा, हरिपाल सिंह, एम.बी. भारद्वाज, बी.जी. शर्मा, डॉ. चंद्र भूषण, अनिल चौधरी, डी.के. शर्मा, आर.एन. सक्सेना, राजश्री रैना, रेखा रस्तोगी, मिथलेश बंसल, सरोज भूषण, पुष्पहेपा शर्मा, प्रेमलता सहित बड़ी संख्या में समिति सदस्य और मातृशक्ति उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल गणेश चतुर्थी की धार्मिक आस्था का प्रतीक था बल्कि शिक्षा और समाज सेवा को समर्पित समिति की दूरदृष्टि और संकल्प का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।



