Ghaziabad

मोहिनी एकादशी व्रत कथा..पंडित शिवगुरु जी की वाणी में

मोहिनी एकादशी का व्रत नियमपूर्वक रखने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, मन की शांति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है, मोह, माया और भ्रम से मुक्ति मिलती है, अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है – ज्योतिषाचार्य पंडित शिवगुरु जी

हे श्रद्धालु जनों, ध्यानपूर्वक श्रवण करें यह पवित्र मोहिनी एकादशी व्रत कथा, प्राचीन समय की बात है। जब देवताओं और दानवों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया, तब अमृत कलश प्रकट हुआ। अमृत को लेकर देव और दानवों में विवाद उत्पन्न हो गया। तब भगवान श्रीहरि विष्णु ने धर्म की रक्षा हेतु एक अद्भुत लीला रची। भगवान विष्णु ने अत्यंत सुंदर स्त्री रूप धारण किया, जिसे मोहिनी रूप कहा गया। मोहिनी के दिव्य रूप को देखकर सभी दानव मोहित हो गए। उन्होंने स्वयं अमृत वितरण का कार्य मोहिनी को सौंप दिया।

मोहिनी रूप में भगवान ने चतुराई से देवताओं को अमृत पिला दिया और दानवों को वंचित कर दिया। इस प्रकार देवताओं की रक्षा हुई और धर्म की विजय हुई।
हे भक्तों, उसी दिव्य लीला की स्मृति में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है।

📿 व्रत का महत्व —

जो भक्त इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखते हैं—
उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं
मन की शांति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है
मोह, माया और भ्रम से मुक्ति मिलती है
अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

🪔 व्रत विधि —

प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
व्रत रखकर कथा श्रवण करें
रात्रि में भजन-कीर्तन करें
द्वादशी को ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देकर व्रत का पारण करें

अंत में सभी भक्तजन मिलकर यह मंत्र बोलें
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
हरि स्मरण, हरि नाम – यही जीवन का कल्याण है।
जय श्री हरि .. जय श्री विष्णु

Deepak Tyagi

वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार, रचनाकार व राजनीतिक विश्लेषक ईमेल आईडी :- deepaklawguy@gmail.com, deepaktyagigzb9@gmail.com टविटर हैंडल :- @DeepakTyagiIND

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button