डॉ. बी.आर. अंबेडकर जन्मोत्सव आयोजन समिति ने किया सेवा कार्यक्रम, कबीर के विचारों को जीवन में उतारने का लिया संकल्प

गाजियाबाद, 29 जून। “जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान, मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान”—संत कबीर दास का यह कालजयी संदेश सोमवार को गाजियाबाद में आयोजित संत कबीर जयंती समारोह में एक बार फिर जीवंत हो उठा। डॉ. बी.आर. अंबेडकर जन्मोत्सव आयोजन समिति की ओर से चार मूर्ति बौद्ध विहार, पुराना बस अड्डा परिसर में संत कबीर दास की जयंती के अवसर पर विशाल शरबत जल सेवा एवं भोजन वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान समिति द्वारा लगभग 5000 लीटर रूह अफजा शरबत का वितरण किया गया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं एवं राहगीरों के लिए वेज बिरयानी की भी व्यवस्था की गई। आयोजन का उद्देश्य गर्मी के मौसम में जनसेवा के साथ-साथ संत कबीर के मानवता, समानता और सामाजिक सद्भाव के संदेश को समाज तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष तरुण कुमार ने कहा कि संत कबीर दास ने अपने संपूर्ण जीवन में समाज को प्रेम, भाईचारे, सत्य, समानता और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव का विरोध करते हुए एक ऐसे समाज की कल्पना की, जहां मनुष्य की पहचान उसके ज्ञान, कर्म और चरित्र से हो, न कि उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि से।
उन्होंने कहा, “संत कबीर दास जी के विचार केवल साहित्य या आध्यात्मिक चिंतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आज भी सामाजिक जागरूकता, समरसता और मानवीय मूल्यों की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। वर्तमान समय में उनके संदेशों को अपनाना पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।”
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि संत कबीर का जीवन समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध एक सतत आंदोलन था। उन्होंने धार्मिक आडंबरों से ऊपर उठकर मानव सेवा, सत्य और नैतिक जीवन को सर्वोच्च महत्व दिया। आयोजन के माध्यम से उपस्थित लोगों ने उनके विचारों को आत्मसात करने तथा समाज सेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम में शेर सिंह एडवोकेट, एडवोकेट रामेश्वर दत्त, पूर्व अध्यक्ष राहुल सिंह, महासचिव दुष्यंत गौतम, कोषाध्यक्ष यशपाल सिंह, ललित दास, शेखर डांगी, महिला अध्यक्ष शारदा, विजय गौरव बौद्ध, मुकेश गौतम, जयप्रकाश सहित समिति के अनेक पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह का समापन संत कबीर के समरस समाज के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और सेवा, समानता तथा भाईचारे की भावना को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।


