कड़ाके की ठंड में नाले में उतरकर अनोखा विरोध, रिटायर्ड व्यक्ति ने इच्छा मृत्यु की उठाई मांग


गाजियाबाद। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच एक रिटायर्ड व्यक्ति ने रविवार सुबह ऐसा कदम उठाया, जिसने प्रशासन और समाज, दोनों का ध्यान खींच लिया। प्रातः करीब सात बजे यह व्यक्ति 36 फीट चौड़े और लगभग 8 फीट गहरे नाले में उतर गया और वहां खड़े होकर राष्ट्रपति तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश से इच्छा मृत्यु की मांग करने लगा। यह विरोध नाले से उठने वाली विषैली गैसों, प्रदूषण और उससे फैल रही जानलेवा बीमारियों के खिलाफ किया गया।
रिटायर्ड व्यक्ति का कहना है कि नाले के आसपास रहने वाले छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं और लोग “तिल-तिल कर मरने” को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से शिकायतों और आश्वासनों के बावजूद नाले के कायाकल्प और स्थायी समाधान के लिए ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई क्षणिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण आंदोलन है। रिटायर्ड व्यक्ति ने ऐलान किया कि हर रविवार वह नाले में उतरकर इसी तरह प्रदर्शन करेगा, जब तक धरातल पर वास्तविक काम होता हुआ दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता ने उन्हें इस चरम प्रतीकात्मक विरोध के लिए मजबूर किया है।
प्रदर्शन के दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर फल वाटिका में विराजमान भगवान शिव, गणपति बप्पा तथा युगपुरुष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का श्रृंगार भी किया, जिसे वे समाज और शासन, दोनों के प्रति अपनी आस्था और अपेक्षा का प्रतीक बताते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले से उठने वाली दुर्गंध और गैसों के कारण सांस की बीमारियां, त्वचा रोग और अन्य गंभीर समस्याएं आम हो गई हैं। नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल वैज्ञानिक सर्वे, प्रदूषण नियंत्रण, नाले की सफाई और स्थायी ट्रीटमेंट प्लांट जैसी ठोस योजनाओं की मांग की है।
फिलहाल, यह शांतिपूर्ण विरोध इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या इस प्रतीकात्मक, लेकिन साहसिक कदम के बाद प्रशासन जागेगा और नाले की समस्या का स्थायी समाधान करेगा, या फिर यह रिटायर्ड व्यक्ति हर रविवार ठंड, जोखिम और असहजता के बीच अपनी आवाज़ यूं ही उठाता रहेगा।


