शीर्षक: रामलीला मैदान में कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने राम-केवट संवाद का मार्मिक वर्णन किया
गाजियाबाद : कवि नगर रामलीला मैदान के कथा पंडाल में कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने आज राम-केवट संवाद का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जैसे भरत के त्याग को हम अतुलनीय मानते हैं, उसी प्रकार केवट जैसी भक्ति ही प्रभु को प्राप्त करने का साधन होती है।
उन्होंने कहा कि राम और भरत ने आपस में संपत्ति का बंटवारा नहीं किया, बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया। इसी प्रकार केवट ने भी निस्वार्थ भाव से श्री राम के चरण धोए। भगवान राम के द्वारा केवट से गंगा पार कराए जाने के आग्रह को केवट ने नकार दिया था। केवट चाहते थे कि वह पहले प्रभु के चरणों को धोए, जिससे प्रभु के चरण स्पर्श करके उनका उद्धार हो सके। प्रभु श्री राम को निवास होकर अपने चरण दिलवा सके और केवट की पीढ़ियों का भी उद्धार हुआ।
भारत में भगवान श्री राम के चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर उनके 14 वर्ष की वनवास से लौटने से पहले ही अयोध्या में राम राज्य स्थापित किया गया। उन्होंने अयोध्या के राज्य में अपना अमूल्य योगदान दिया। आज राजनीतिक क्षेत्र में भरत जैसे उदाहरण को आत्मसात करने की आवश्यकता है। देश की प्रत्येक नागरिक को भी यह समझना चाहिए कि देश के विकास के लिए उसका क्या योगदान है। अगर वह इस पर चिंतन करेंगे तो निश्चित रूप से देश अल्पकाल में ही प्रगति पा सकेगा।
हमारे उम्मीद और पुराण हमारे ज्ञान का विस्तार करते हैं और ज्ञान के विस्तार से विकास की दिशा को गति मिलती है। स्वामी विवेकानंद, अब्दुल कलाम जैसे अन्य लोग उदाहरण हैं जिन्होंने हमारे शास्त्रों का अध्ययन किया और अपनी योग्यता का विकास करके संपूर्ण जीवन राष्ट्र कार्य को समर्पित कर दिया। उन्होंने श्रोताओं को समझाते हुए कहा कि श्रेष्ठता मनुष्य को सफल बनाती है। कोई भी कनिष्क व्यक्ति श्रेष्ठता के आधार पर वरिष्ठ बन सकता है।
भारत और केवट के त्याग और भक्ति की श्रेष्ठता को आज के युवा को समझने की आवश्यकता है।
कथा के सातवें दिन के मुख्य यजमान ललित जायसवाल के साथ-साथ दिवस यजमान के रूप में बृजमोहन सचदेवा, राहुल यादव, पंडित राजभद्र मिश्र, अमित कुमार उपस्थित रहे। मंच संचालन मनीष अग्रवाल ने किया। गुलशन बजाज, डा० अरुण अरोड़ा, रजनीश अग्रवाल, अरुण सिंघल, वेदपाल नोएडा, नवनीत प्रिय दास, ईश्वर चन्द्र क्षेत्रीय धर्म जागरण प्रमुख आदि उपस्थित रहें।



