दशमेश वाटिका में साहिबज़ादों के बलिदान को नमन, संगत ने लगाया दूध का लंगर

गाजियाबाद।
सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबज़ादों के महान बलिदान की स्मृति में दशमेश वाटिका में श्रद्धा और सेवा भाव से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगत की ओर से दूध का लंगर लगाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और छोटे साहिबज़ादों को श्रद्धां सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संगत ने गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—के अद्वितीय साहस और धर्म रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि कम आयु में भी साहिबज़ादों ने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय अपने प्राणों की आहुति देकर मानवता और धर्म की रक्षा का अमर संदेश दिया।
दूध के लंगर में सेवा करते हुए गुरप्रीत सिंह रम्मी, शरनजीत सिंह आनंद, गगन सिंह अरोड़ा, जसविंदर सिंह सन्नी, कंवलजीत सिंह सिक्का, मन्नी रियाड, अमृतपाल सिंह, कुलदीप सिंह, जोगेंद्र सिंह अरोड़ा, सरबजीत सिंह घई, गुरप्रीत सिंह, एस.पी. सिंह, राजेंद्र सिंह, जसविंदर सिंह एवं जगमोहन सिंह सहित अनेक सेवादारों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
इस अवसर पर संगत ने छोटे साहिबज़ादों के बलिदान की स्मृति में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ घोषित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को साहिबज़ादों के त्याग, साहस और राष्ट्रधर्म के मूल्यों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पूरे कार्यक्रम के दौरान दशमेश वाटिका का वातावरण ‘वाहेगुरु’ के जयकारों और सेवा भावना से भक्तिमय बना रहा।


