विज्ञान घर में दूसरे दिन के वैज्ञानिक अन्वेषण

मेरठ: लोहियानगर स्थित सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल के रियलिटी शो ‘विज्ञान घर’ सीज़न 4 में पहले दिन प्रवेश कर सभी बच्चे इस नई दुनिया में आकर आश्चर्यचकित थे, क्योंकि यहाँ सब कुछ विज्ञान से संबंधित था और एकदम नया था। दीवारे हो या छत या लॉन सब जगह विज्ञान और उससे संबंधित कलाकृति या संदेश ही दिखाई दे रही थी। इस दौरान जो उत्साह और उमंग बच्चों में विज्ञान घर में प्रवेश से पहले दिखाई दे रहा था, यहाँ आकर वह और अधिक बढ़ गया था।
विज्ञान घर में दूसरे दिन से प्रतिभागियों को टास्क मिलने शुरु हो गए। जिसे सभी प्रतिभागियों ने अपनी सूझबूझ और वैज्ञानिक तरीकों से पूर्ण किए ।

टास्क एक – फिटकरी (पोटाश एलम) बनाना विज्ञान योद्धाओं को विज्ञान रसायन प्रयोगशाला में सत्मकाम इंटरनेशनल स्कूल के विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा फिटकरी बनाने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रक्रिया में सभी कदमों को सावधानी पूर्वक और रसायनिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए किया ।
टास्क दो – दूसरे दिन सभी प्रतिभागियों मे से एक को विज्ञान पुत्र/ पुत्री के लिए चुना जाना था, जिसमें आरजू को दूसरी विज्ञान पुत्री चुनी गई।
टास्क तीन – आँखों के धोखे द्वारा हथेली का छेद बताना।
टास्क चार – पाइप एवं कागज़ के द्वारा मुंह से बजाने वाला यंत्र बनाना सिखाया।
टास्क पाँच – आउट डोर एक्टिविटी में पेड की संरचना जानना। इसके अतिरिक्त बच्चों को यह भी बताया गया कि कल सारे ग्रह एक साथ दिखाई देंगे ।

विज्ञान घर सीजन 4 के दूसरे दिन आए अतिथियों में से एक पूर्व राजदूत अशोक शर्मा ने बताया कि पर्यावरण को बचाने के लिये वौवज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास आवश्यक है। मानव शायद एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो अपने विनाश की प्रक्रिया को स्वयं त्वरित करने के लिये ज़िम्मेदार है। पिछले 200 वर्षों में हमने अपने प्राकृतिक संसाधनों का इतना विदोहन किया है जितना कि पिछले 10,000 साल में भी नहीं हुआ था और यह सब विकास के नाम पर ही किया गया है। हमें मानव सभ्यता के विकास के इस मॉडल (प्रारूप) को बदलना होगा क्योंकि यह विनाश की ओर ले जा रहा है।
अंत में आई० यू ० सी० एन० विश्व आयोग सदस्य डा. मोहम्मद यासीन बताया कि पिछले 50 सालो में औसत तापमान में बढ़ोतरी से बारिश पर भी असर, ओजोन का लगातार रिक्तिकरण अधिकतम जनजीवन के साथ – साथ कृषि को भी प्रभावित कर रहा हो मानवीय गतिविधियो के चलते ओजोन पर दिन पे दिन कम होती जा रहीं हैं जिससे पराबैंगनी विकिरणे पहुंच रही है। जो पर्यावरण के साथ साथ जंतुओं, पेड़ पौधों व मनुष्य के जीवन को प्रभावित कर रही है।

इसी गतिविधि को कल विद्यार्थियों द्वारा उपकरण की सहायता से नापा जाऐगा जो मेरठ शहर के लिए अपनी तरह का पहला अध्ययन होगा । इन्हीं गतिविधियों के साथ विज्ञान घर सीज़न 4 के दूसरे दिन का समापन किया गया।


