NEET में फायदा उठाने के लिए 14 छात्रों ने बनाए फर्जी आश्रित प्रमाण पत्र, DM की जांच में खुलासा, गाजियाबाद के 8 अभ्यर्थी शामिल
मेरठ। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में आरक्षण का लाभ लेने के लिए छात्रों ने बड़ा फर्जीवाड़ा कर डाला। मेरठ में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित प्रमाण पत्र वेरिफिकेशन के दौरान यह खुलासा हुआ कि 15 में से 14 प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। जांच में सामने आया कि छात्रों ने फर्जी मुहर और नकली हस्ताक्षर लगाकर प्रमाण पत्र तैयार किए और उन्हें परीक्षा में लाभ के लिए प्रस्तुत भी किया।
जांच का खुलासा
डीएम डॉ. वी.के. सिंह ने मामले की गहन जांच कराई, जिसमें गाजियाबाद, अमरोहा, नोएडा, एटा, कानपुर और मुरादाबाद के छात्र शामिल पाए गए। इनमें से अकेले गाजियाबाद के 8 छात्र इस फर्जीवाड़े का हिस्सा हैं। डीएम ने पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी है और अब फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
ये छात्र पाए गए दोषी
गाजियाबाद के दक्ष सचदेवा, नैंसी खंडेवाल, विशाल कुमार, स्मृति आनंद, मानविका चौहान, प्रेरणा शेखर, वर्तिका और कीर्ति नारायण यादव,
अमरोहा की आफिया रानी और आर्शिया अग्रवाल,
नोएडा की श्वेता सिंह,
एटा के गुड्डू कुमार,
कानपुर का आफताब,
मुरादाबाद की रेने सिंह के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
केवल मेरठ निवासी अर्नव गर्ग का प्रमाण पत्र सही पाया गया।
DM की सख्ती
डीएम डॉ. वी.के. सिंह ने साफ किया कि ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। यह न केवल शैक्षिक प्रणाली के साथ धोखा है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ है।
इस मामले ने छात्रों के बीच पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन अब इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल करेगा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कैसे किए गए।


