महिला जिला अस्पताल के कचरा dump में आग, तीन एंबुलेंस जलकर खाकसफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

मेरठ : जिला महिला अस्पताल (डफरिन) परिसर में शनिवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब अस्पताल के कचरा dump में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते लपटों ने पास खड़ी तीन एंबुलेंस को अपनी चपेट में ले लिया। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ ही मिनटों में तीनों वाहन जलकर राख हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अस्पताल परिसर में स्थित कचरे के ढेर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ ही क्षणों में वहां आग भड़क गई, जो तेज़ी से फैलकर पास खड़ी उपयोग में न आने वाली एंबुलेंसों तक पहुंच गई। मौके पर भारी धुआं फैल गया और अस्पताल से गुजरने वाला मार्ग कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा।
सूचना मिलते ही घंटाघर फायर स्टेशन से दमकल की दो गाड़ियाँ मौके पर भेजी गईं। बड़ी दमकल गाड़ी अस्पताल परिसर में प्रवेश न कर पाने के कारण दमकलकर्मियों को छोटी गाड़ी तैनात करनी पड़ी। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक तीनों एंबुलेंस पूरी तरह जल चुकी थीं।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ये एंबुलेंस पहले से ही कंडेम्ड थीं और स्क्रैप के रूप में कचरा स्थल के पास खड़ी की गई थीं। हालाँकि, यह दावा स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों को संतुष्ट नहीं कर पाया। लोगों ने सवाल उठाए कि अस्पताल परिसर में कचरा dump में इतनी बड़ी आग कैसे लग गई और यह घटना वार्डों से सिर्फ 70 मीटर की दूरी पर सुरक्षा मानकों की पोल क्यों खोलती है?
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब कुछ ही दिन पहले उत्तर प्रदेश के मंत्री-प्रभारी धर्मपाल सिंह ने 27 नवंबर को एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज सहित अन्य स्वास्थ्य इकाइयों का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने एक माह के भीतर साफ-सफाई दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद महिला अस्पताल में हालात जस के तस दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में कचरा प्रबंधन, सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर लगातार लापरवाही देखी जा रही है। एंबुलेंस जलने की यह घटना साफ़ दर्शाती है कि स्वास्थ्य संस्थानों में बुनियादी सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
घटना ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, और अब सभी की नजरें अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।


