हाई कोर्ट बेंच की मांग पर पश्चिमी यूपी में पूर्ण बंद, मेरठ सहित 20 से अधिक जिलों में जनजीवन ठप

मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर बुधवार को मेरठ सहित 20 से अधिक जिलों में पूर्ण बंद रहा। बंद के चलते मेरठ शहर के बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और जनजीवन लगभग ठहर सा गया। व्यापारियों, चिकित्सकों, मेडिकल स्टोर्स, पेट्रोल पंप संचालकों सहित विभिन्न वर्गों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दिया।
यह बंद केंद्रीय संघ समिति हाई कोर्ट बेंच के आह्वान पर किया गया, जिसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के अधिवक्ताओं के साथ-साथ अनेक व्यापारिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ। बिजनौर और शामली में भी अधिवक्ता हड़ताल पर रहे और न्यायिक कार्य प्रभावित रहा।
केंद्रीय संघ समिति हाई कोर्ट बेंच के अध्यक्ष एवं मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि मेरठ बंद को लगभग 1200 संगठनों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। शहर में जीरोमाइल, हापुड़ चुंगी, बेगमपुर कुटी चौराहा सहित लगभग 35 प्रमुख स्थानों पर अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण धरना दिया और हाई कोर्ट बेंच की आवश्यकता को लेकर आमजन को जागरूक किया।


धरना स्थलों पर अधिवक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला और औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद अब तक हाई कोर्ट बेंच से वंचित है, जिसके कारण न्याय के लिए लोगों को इलाहाबाद तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय, धन और श्रम की भारी क्षति होती है।
बंद को सफल बनाने के लिए कई राजनीतिक दलों के नेता भी मंच पर दिखाई दिए और उन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया। अधिवक्ताओं ने सभी वर्गों से अपील की कि वे इस न्यायोचित मांग के समर्थन में एकजुट रहें।
दिनभर चले बंद के कारण मेरठ सहित आसपास के क्षेत्रों में यातायात कम रहा और बाजार पूरी तरह बंद नजर आए। हालांकि, आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग पूरी नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।


