हस्तिनापुर से मोहभंग: राज्यमंत्री दिनेश खटीक का बड़ा बयान, राजनीति में हलचल तेज
मेरठ।
उत्तर प्रदेश सरकार में जल शक्ति राज्यमंत्री और हस्तिनापुर विधानसभा से दो बार विधायक रहे दिनेश खटीक एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र में आयोजित एक स्कूल के वार्षिक समारोह के मंच से राज्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि वह हस्तिनापुर से तीसरी बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है।
राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने हस्तिनापुर को “श्रापित भूमि” बताते हुए कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार यह क्षेत्र द्रौपदी के श्राप से ग्रस्त माना जाता है। उन्होंने कहा कि मान्यता है—“जिस धरती पर नारी का सम्मान नहीं होता, वहां कभी विकास नहीं होता।” इसी कथन के साथ उन्होंने संकेत दिया कि वह इस विधानसभा से आगे राजनीतिक सफर जारी नहीं रखना चाहते।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम की उपस्थिति भी रही, जिससे राज्यमंत्री के बयान को और अधिक महत्व मिल गया। राजनीतिक गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब पंचायत चुनाव नजदीक हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह वक्तव्य न केवल व्यक्तिगत भावनाओं को दर्शाता है, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों की ओर भी इशारा करता है।
दिनेश खटीक की घोषणा के बाद हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। समर्थकों और विपक्षी दलों के बीच इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा इस सीट से आगे किस चेहरे को मैदान में उतारेगी। वहीं, कुछ लोग इसे सामाजिक संदेश के रूप में भी देख रहे हैं, जिसमें नारी सम्मान और सामाजिक चेतना पर जोर दिया गया है।
गौरतलब है कि दिनेश खटीक हस्तिनापुर से लगातार दूसरी बार विधायक हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनके चुनाव न लड़ने की घोषणा ने स्थानीय राजनीति को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का पंचायत और भविष्य के विधानसभा चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है।


