भाकियू का धरना समाप्त, सभी मांगें मानी गईं; देर रात खत्म हुआ आंदोलन

अपडेट | मेरठ
मेरठ के पांडव नगर स्थित गन्ना भवन में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का धरना सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद देर रात समाप्त हो गया। गन्ना विभाग और प्रशासन के साथ हुई वार्ता में किसानों की समस्याओं पर सहमति बनने के बाद भाकियू ने धरना समाप्त करने की घोषणा की।
भाकियू पदाधिकारियों के अनुसार, प्रशासन ने किनौनी चीनी मिल के शेष भुगतान को शीघ्र कराने, जिले की सभी चीनी मिलों में एक समान नियम लागू करने, गन्ना तौल में कटौती की शिकायतों की जांच कर कार्रवाई करने तथा गन्ना ढुलाई भाड़े में की गई वृद्धि पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई है। आश्वासन के बाद किसानों ने आंदोलन वापस ले लिया।
धरना समाप्ति से पहले गन्ना भवन परिसर में सांस्कृतिक माहौल भी देखने को मिला। धरना स्थल पर पहुंचे रागिनी कलाकार ने प्रस्तुति दी, जिसे किसानों ने तालियों के साथ सराहा। वहीं सपेरा जाति के कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक कलाओं से उपस्थित किसानों का मन मोह लिया।
भाकियू नेताओं ने कहा कि यदि भविष्य में दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ तो संगठन दोबारा आंदोलन के लिए बाध्य होगा। फिलहाल किसानों में धरना समाप्त होने के बाद संतोष का माहौल है।
गन्ना भवन में भाकियू का धरना जारी, महापंचायत में उमड़े किसान; मिलों पर तौल में गड़बड़ी और भेदभाव के आरोप
मेरठ |: मेरठ के पांडव नगर स्थित गन्ना भवन में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का धरना कई दिनों से लगातार जारी है। धरने के दौरान भाकियू के जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी ने गन्ना विभाग और चीनी मिल प्रबंधन पर किसानों के शोषण के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मीडिया और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में कहा कि जिले में संचालित समितियों और चीनी मिलों पर अलग-अलग नियम लागू किए जा रहे हैं, जिससे किसानों के साथ भेदभाव हो रहा है।
अनुराग चौधरी ने आरोप लगाया कि मोहद्दीनपुर और मवाना चीनी मिलों में गन्ना तौल के निर्धारित मानकों में गड़बड़ी की जा रही है। करिया केंद्रों पर किसानों के गन्ने में लगभग दो प्रतिशत तक की कटौती की जा रही है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन गन्ना प्रजातियों की बुवाई किसानों ने मिलों के निर्देश पर की थी, अब वही प्रजातियां लेने से मिलें इनकार कर रही हैं।
धरने के दौरान वार्ता के लिए पहुंचे गन्ना विभाग के अधिकारियों के सामने किसान चार अलग-अलग प्रकार का गन्ना लेकर पहुंचे, लेकिन विभागीय अधिकारी और कुछ चीनी मिलों के प्रबंधक किसी भी प्रजाति की स्पष्ट पहचान नहीं कर सके। इससे आक्रोशित किसानों ने गन्ना परिसर में लगभग 15 फीट लंबा गन्ना खड़ा कर उसे प्रतीकात्मक रूप से “बेनाम बादशाह” नाम दिया। इसके बाद गेट के बाहर गन्ने की होली जलाकर जमकर नारेबाजी की गई।


भाकियू की प्रमुख मांगों में किनौनी चीनी मिल द्वारा सत्र 2025-26 का शेष भुगतान शीघ्र कराना, जिले की सभी छह चीनी मिलों को एक समान नियमों के तहत संचालित करना तथा गन्ना ढुलाई भाड़े में की गई 15 पैसे प्रति कुंतल की वृद्धि को वापस लेना शामिल है।
धरने के समर्थन में सोमवार को गन्ना भवन परिसर में भाकियू की महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों किसानों ने भाग लिया। महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत भी पहुंचे और किसानों को संबोधित किया। इस दौरान गन्ना विभाग के उच्च अधिकारी डिप्टी सीसी भी मौके पर पहुंचे। राकेश टिकैत ने अधिकारियों से किसानों की समस्याओं को लेकर बातचीत की और शीघ्र समाधान की मांग की।
महापंचायत में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला। धरना स्थल पर पहुंचे रागिनी कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं, वहीं सपेरा जाति के लोगों ने भी अपनी कलाओं से किसानों का मन मोह लिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


