विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026: इलाज संभव, असली चुनौती है सामाजिक कलंक

मेरठ। भारत में विश्व कुष्ठ दिवस को हर वर्ष 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। यह दिन कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के सम्मान, उनके प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और समाज में फैले भेदभाव व कलंक को समाप्त करने का संदेश देता है।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व कुष्ठ रोग दिवस हर साल जनवरी के अंतिम रविवार को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह दिवस 25 जनवरी को मनाया गया। यह अवसर उन लोगों के संघर्ष और साहस को सम्मान देने के साथ-साथ समाज को यह समझाने का भी माध्यम है कि कुष्ठ रोग आज पूरी तरह उपचार योग्य है।
2026 की थीम: “कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, असली चुनौती तो इससे जुड़ा कलंक है”
विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 की थीम —
“कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, असली चुनौती तो इससे जुड़ा कलंक है” — इस बात पर जोर देती है कि बीमारी से अधिक गंभीर समस्या उससे जुड़ा सामाजिक भेदभाव है। यह थीम कुष्ठ रोग को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने, पीड़ितों के सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों को उजागर करने और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान करती है।
विशेषज्ञों ने जागरूकता पर दिया जोर
इस अवसर पर लाला लाजपत राय स्मारक चिकित्सा महाविद्यालय, मेरठ के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि समय पर पहचान और इलाज से कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
डॉ. अमरजीत सिंह, प्रोफेसर,
डॉ. सौम्या सिंघल, एसोसिएट प्रोफेसर,
डॉ. आकांक्षा अस्तिक, असिस्टेंट प्रोफेसर —
ने संयुक्त रूप से बताया कि आज भी कई लोग सामाजिक डर और गलत धारणाओं के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग से जुड़ा कलंक ही सबसे बड़ी बाधा है, जिसे जागरूकता, शिक्षा और संवेदनशील व्यवहार के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है।
चिकित्सकों ने आम नागरिकों से अपील की कि कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें और प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति व सम्मानपूर्ण व्यवहार अपनाएं।
सम्मान और समानता का संदेश
विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व कुष्ठ रोग दिवस केवल एक जागरूकता दिवस नहीं, बल्कि यह समाज को यह याद दिलाने का अवसर भी है कि हर व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है।


