छेड़छाड़ से तंग आकर युवती ने की आत्महत्या, महिला आयोग पहुंचा पीड़ित परिवार के द्वार

✍️ लोकल पोस्ट संवाददाता | मेरठ | 18 जून 2025
मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर एक युवती ने 17 जून 2025 की शाम को आत्महत्या कर ली। मामले ने तूल तब पकड़ा जब मृतका की मां ने आरोप लगाया कि थाना लोहियानगर पुलिस ने पहले से दर्ज मुकदमे पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों का हौसला बढ़ता गया।
आरोपियों पर कार्रवाई न होने से बना दबाव
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी छेड़छाड़ और धमकी के संबंध में थाना लोहियानगर में एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कठोर कदम नहीं उठाया। मृतका की मां का कहना है कि आरोपी लगातार समझौते का दबाव बना रहे थे और जान से मारने की धमकी भी दे रहे थे।
इस निरंतर उत्पीड़न से तंग आकर युवती ने अपनी जान दे दी।
महिला आयोग ने दिया साथ का भरोसा
घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्या डॉ. हिमानी अग्रवाल ने 18 जून को पीड़ित परिवार से भेंट की। “आपके द्वार” अभियान के अंतर्गत वह सीधे थाना लिसाड़ी क्षेत्र पहुंचीं और पीड़िता की मां से बातचीत की।
डॉ. हिमानी अग्रवाल ने परिवार को आश्वासन देते हुए कहा:
“इस दुःख की घड़ी में आप अकेले नहीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग आपके साथ खड़ा है। आप मुझसे कभी भी संपर्क कर सकते हैं, हर संभव सहायता दी जाएगी।“
उन्होंने मौके पर अपना निजी संपर्क नंबर भी परिजनों को दिया और भरोसा दिलाया कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
पुलिस को दिए गए कड़े निर्देश
डॉ. हिमानी अग्रवाल ने इस मामले को लेकर स्थानीय पुलिस अधिकारियों से भी वार्ता की और आरोपियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित परिवार की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने को कहा, ताकि आगे किसी प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
न्याय की उम्मीद में एक माँ
मृतका की मां ने रोते हुए बताया,
“मेरी बेटी की जान चली गई, लेकिन अब मैं चाहती हूं कि कोई और बेटी ऐसे हालात में न पहुंचे। हमें न्याय चाहिए।“
आगे की कार्रवाई
अब यह देखना होगा कि पुलिस प्रशासन और महिला आयोग मिलकर इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्यवाही करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे थानों में महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है?


