सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी ने महात्मा गांधी की 79वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

गाजियाबाद। सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी (सुभास पार्टी) ने जगदीश नगर स्थित अपने कार्यालय पर महात्मा गांधी की 79वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर पार्टी के संयोजक व संस्थापक सतेन्द्र यादव ने राष्ट्रपिता के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के विचार और प्रयोग ही भारत को सशक्त राष्ट्र बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में गांधीजी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। विशेष रूप से ग्राम स्वराज की अवधारणा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि देश और दुनिया का कल्याण गांधीजी के ग्राम स्वराज के मार्ग से ही संभव है।
प्रदेश प्रवक्ता विनोद सिंह अकेला ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज कुछ ऐसे लोग सत्ता में हैं जिनका आज़ादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था और वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेताओं के बीच विभेद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि स्वयं नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दी थी।
उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि शहीद राम प्रसाद बिस्मिल ने भी फांसी के फंदे पर झूलते समय देश के युवाओं से महात्मा गांधी के साथ मिलकर कार्य करने का आह्वान किया था।
पूर्व सांसद प्रत्याशी धीरेंद्र सिंह भदौरिया ने कहा कि देश की आज़ादी में महात्मा गांधी का योगदान अमूल्य है, जिसे देश कभी चुका नहीं सकता।
उत्तर प्रदेश और बिहार प्रभारी अनिल सिन्हा ने कहा कि गांधीजी ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने का जो संदेश दिया था, उससे अंग्रेजी शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंची थी। उन्होंने कहा कि यदि आज भी देश गांधीजी की स्वदेशी नीति पर चले, तो भारत का भविष्य और अधिक उज्ज्वल हो सकता है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अनिल सिन्हा, विनोद कुमार अकेला, तेजेन्द्र कुमार वर्मा, अनुपम अग्रवाल, सत्येंद्र यादव, धीरेंद्र सिंह भदौरिया, राजेंद्र यादव, नसरुद्दीन मलिक, जगदीश राय, दीपक वर्मा, विकास कुमार, दीपक पाल, रिंकू कुमार, विवेक राणा, आबिद, इर्शाद, हरीश शर्मा, रोहित कुमार सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

