संस्कार भारती राजनगर एक्सटेंशन ईकाई ने किया संस्कार मित्र मिलन कार्यक्रम का सफल आयोजन

गाज़ियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित आशियाना शिव मंदिर परिसर में रविवार, 21 सितंबर 2025 को शाम 4 बजे से 6 बजे तक संस्कार भारती राजनगर एक्सटेंशन ईकाई द्वारा एक भव्य संस्कार मित्र मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निखिल त्यागी, अध्यक्ष शिव मंदिर समिति, आशियाना सोसायटी, ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र और सरस्वती पूजन से हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने भाग लिया। इसके बाद संस्कार भारती ध्येय गीत का मधुर प्रस्तुति अमृता श्रीवास्तव और उनके बच्चों ने दी। अमृता श्रीवास्तव ने अपनी सुरीली आवाज़ में राम स्तुति गाकर कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और संस्कार भारती के कार्यकारी अध्यक्ष अतुल प्रकाश भटनागर ने संगठन के उद्देश्य और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कार भारती की स्थापना कला की सृजनात्मकता, सामाजिकता और शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा मनुष्य में सत्य, शिव और सुंदर के साक्षात्कार के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि संस्था कला, करुणा और मानवीयता को जोड़कर समाज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करने का संकल्प लिए हुए है।
मुख्य अतिथि हेमंत त्यागी, मंडल अध्यक्ष भाजपा नंदग्राम, ने बताया कि संस्कार भारती एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो विश्वभर में भारतीय संस्कृति की पताका फहरा रहा है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार त्यागी ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों में संस्कार और सभ्यता की शिक्षा देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम में बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। सनत जैन ने अपनी सुंदर कविता सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। वहीं चिंकी शर्मा (संयोजिका रामेश्वरम सोसायटी) के निर्देशन में बच्चों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक नृत्य ने खूब तालियां बटोरीं।
गुलमोहर गार्डन सोसायटी की संयोजिकाएं रेनू सिंह और नीतू मिश्रा ने बताया कि उनकी सोसायटी से रिचा वार्ष्णेय, तनु त्रिहान, अंजू, संगीता त्यागी सहित कई महिलाएं और बच्चे कार्यक्रम में शामिल हुए और इस आयोजन की सराहना की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सत्य प्रकाश भटनागर (संयोजक गुलमोहर सोसायटी), निशांत कौशिक (सह संयोजक राजनगर एक्सटेंशन), सन्नी भल्ला और डॉ. सरिता का विशेष योगदान रहा।
यह आयोजन न केवल भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मजबूत करने का प्रयास था, बल्कि बच्चों और युवाओं को संस्कारों की शिक्षा देने का एक सशक्त मंच भी बना।



