राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, मातृभाषा जागरूकता और जेंडर संवेदनशीलता पर सुभारती में विविध कार्यक्रम आयोजित

मेरठ। समाज में जागरूकता, राष्ट्रीय मूल्यों के संवर्धन तथा समावेशी सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। एक ओर गुरुग्राम के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कादरपुर में राष्ट्रीय चरित्र निर्माण अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ, वहीं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं की भूमिका तथा जेंडर सेंसिटाइजेशन विषयों पर विशेष कार्यक्रम संपन्न हुए।
राष्ट्रीय चरित्र निर्माण अभियान के तहत कार्यक्रम
गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कादरपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. शोभा गुप्ता एवं श्री आमोद गुप्ता का विद्यालय प्रबंधन द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम में लगभग 200 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में डॉ. शोभा गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय चरित्र निर्माण अभियान का शुभारंभ 8 दिसंबर 2025 को गुरुग्राम में माननीय डॉ. अतुल कृष्ण (संस्थापक, सुभारती समूह) की अध्यक्षता में हुआ था। उन्होंने विद्यार्थियों को “देश प्रथम, सदैव प्रथम”, “जय हिंद” और “वंदे मातरम्” जैसे मूल्यों से अवगत कराते हुए सुभाष चंद्र बोस सहित स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर प्रकाश डाला। साथ ही स्वच्छता के महत्व पर जोर देते हुए सही तरीके से हाथ धोने की प्रक्रिया भी समझाई।
श्री आमोद गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए विद्यार्थियों को अपने जन्मदिन पर एक पौधा लगाने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को जलपान वितरित किया गया।
विधि शिक्षा में भारतीय भाषाओं की भूमिका पर जागरूकता वार्ता
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ में “माँ, मातृभूमि एवं मातृ भाषा का कोई विकल्प नहीं” अभियान के अंतर्गत “विधि शिक्षा एवं न्याय प्रणाली में भारतीय भाषाओं की भूमिका” विषय पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन निदेशक राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय) के निर्देशन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई के संरक्षण में हुआ। मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर श्रीमती आलोक शर्मा ने न्याय को जनभाषा में सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा संवाद की बाधाओं को कम कर न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाती है।
भारतीय भाषा अभियान के क्षेत्रीय समन्वयक राजेंद्र शुक्ला ने भाषाई जागरूकता आंदोलनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की प्रासंगिकता समझाई। अधिवक्ता भावेश बेनीवाल ने कहा कि मातृभाषा में दक्षता वकीलों को मुवक्किलों से बेहतर संवाद स्थापित करने में मदद करती है। अंत में डीन अनुसंधान प्रो. डॉ. वैभव गोयल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
जेंडर सेंसिटाइजेशन थीम पर फैशन रैम्प वॉक
विश्वविद्यालय के SITE कॉलेज परिसर में जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल एवं एकलव्य क्लब के संयुक्त तत्वावधान में फैशन रैम्प वॉक प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देना रहा।
प्रतिभागियों ने विभिन्न पेशेवर परिधानों के माध्यम से संदेश दिया कि सफलता के लिए लिंग नहीं बल्कि प्रतिभा और परिश्रम महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम डॉ. श्वेता भारद्वाज के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस अवसर पर कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा, सीईओ प्रो. (डॉ.) शाल्या राज, डीन डॉ. मनोज कपिल, डॉ. सारिका अभय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता में नंदिनी गुप्ता को प्रथम, अक्षिता त्यागी एवं दीपांशु साहू को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के सफल संचालन में एकलव्य क्लब के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
इन सभी कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक संवेदनशीलता, भाषाई सम्मान और लैंगिक समानता जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


