मेडिकल कॉलेज मेरठ में डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग मोबाइल वैन का लोकार्पण

मेरठ। लाला लाजपत राय स्मारक (एलएलआरएम) मेडिकल कॉलेज, मेरठ के उच्चीकृत नेत्र रोग विभाग में संचालित “डायबिटिक रेटिनोपैथी सेंटर” द्वारा तैयार की गई डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग मोबाइल वैन का लोकार्पण शनिवार को मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री अरुण गोविल ने किया। इस अवसर पर कॉलेज प्रशासन, चिकित्सकगण एवं स्टाफ उपस्थित रहे।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ के नेत्र रोग विभाग को केजीएमयू लखनऊ और राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रयागराज के साथ “एडवांस डायबिटिक रेटिनोपैथी सेंटर” के रूप में घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि मधुमेह के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण आंखों की रेटिना से जुड़ी जटिलताएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में समय रहते जांच और उपचार अत्यंत आवश्यक है।
विभाग के रेटिना विशेषज्ञ डॉ. प्रियांक ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी की समय पर पहचान और उपचार से अंधता को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से इस अत्याधुनिक मोबाइल वैन को तैयार कराया गया है, ताकि दूरदराज क्षेत्रों में भी मरीजों को जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
मोबाइल वैन में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से लैस फंडस कैमरा, इंडायरेक्ट ऑप्थैल्मोस्कोप, स्लिट लैम्प, एनसीटी, ऑटोरेफ्रैक्टोमीटर, चेयर यूनिट सहित कई आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इसके अलावा आमजन को नेत्र रोगों के प्रति जागरूक करने के लिए एलईडी स्क्रीन भी स्थापित की गई है, जिस पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रसारित की जाएगी।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस वाहन का उपयोग विभाग द्वारा आयोजित विभिन्न नेत्र जांच शिविरों में किया जाएगा, जहां मरीजों को निःशुल्क सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
इस अवसर पर सांसद अरुण गोविल ने जनमानस से अपील करते हुए कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाएं तथा नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
लोकार्पण कार्यक्रम में उप-प्रधानाचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक, विभिन्न विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, जूनियर एवं सीनियर रेजिडेंट्स, पैरामेडिकल स्टाफ एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
यह पहल मधुमेह से प्रभावित मरीजों में अंधता की रोकथाम तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


