पद्मश्री बेकल उत्साही की स्मृति में भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरा आयोजित

नई दिल्ली। हिंदी और उर्दू साहित्य की साझा सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन राजधानी दिल्ली में किया गया। ‘बेकल उत्साही फ़ाउंडेशन’ द्वारा हिंदी अकादमी दिल्ली और उर्दू अकादमी दिल्ली के सहयोग से महादेव रोड स्थित सभागार में आयोजित यह कार्यक्रम पद्मश्री बेकल उत्साही की स्मृति को समर्पित रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार पद्मश्री अशोक चक्रधर ने की, जबकि संचालन प्रसिद्ध शायर दीक्षित दनकौरी ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत बेकल उत्साही की प्रसिद्ध पंक्तियों –
“धर्म मेरा इस्लाम है, भारत जन्म स्थान,
वजू करूं अजमेर में, काशी में स्नान।”
के भावपूर्ण स्मरण के साथ हुई, जिसने सभागार में मौजूद श्रोताओं को गंगा-जमुनी तहज़ीब की भावना से ओतप्रोत कर दिया।
कवि सम्मेलन और मुशायरे में देश के नामचीन कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। प्रमुख प्रतिभागियों में बुद्धिनाथ मिश्र, शबीना अदीब, जौहर कानपुरी, पॉपुलर मेरठी, इफ्फ़त ज़रीन, अफ़ज़ल मंगलौरी, अरविंद ‘असर’, मीरा नवेली, राजीव रियाज़, क़मर जावेद, गार्गी कौशिक, जावेद मुशीरी तथा ज़रीन सिद्दीकी शामिल रहे। सभी रचनाकारों ने अपने प्रभावशाली काव्य पाठ से श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में जनार्दन द्विवेदी और संदीप मारवाह उपस्थित रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में बेकल उत्साही के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति की समावेशी परंपरा और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक हैं।
आयोजन की संयोजिका एवं बेकल उत्साही की सुपुत्री आरिफ़ा उत्साही ने ‘उत्साही परिवार’ की ओर से सभी कवियों, शायरों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन साहित्यिक विरासत को जीवित रखने और नई पीढ़ी को उससे जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कार्यक्रम देर रात तक काव्य रस से सराबोर वातावरण में चलता रहा और श्रोताओं ने इसे यादगार आयोजन बताया।

